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'मेक फॉर इंडिया पर ध्यान दे मोदी सरकार'

Fri, 12 Dec 2014 03:59 PM IST
Updated Fri, 12 Dec 2014 03:59 PM IST
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raghuram rajan ask government to should also focus on make for india

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि आरबीआई का काम सेंसेक्स में तेजी लाना नहीं है। आरबीआई का काम जमीन हकीकत को ध्यान में रखकर निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि आरबीआई महंगाई पर लगातार ध्यान रखता है जिससे सतत विकास पर कोई भी प्रभाव न पड़े।

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उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में हमें एक रास्ते का चुनाव करना होगा जिससे महंगाई की दर में कमी आ सके। उन्होंने कहा कि राजकोषीय समेकन के लिए भारत को और अधिक संस्थानों की जरूरत है। इस पर बहस होनी चाहिए। इसके जरिए हम कैसे अच्छे और बढ़िया बजट के बावजूद वित्तीय घाटे को कम किया जा सके।
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भारत को ऐसी कोई भी जरूरत नहीं है नियमों को ताक पर विदेशी निवेशकों को आर्कषित किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर हम नई कंपनियों के लिए भारत में व्यापार की सुविधा को आसान और पारदर्शी बनाते हैं तो हम विदेशी निवेशकों को अपने आप ही प्राप्त कर लेंगे।
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उन्होंने कहा कि भारत को विदेशी निवेश की जरूरत है। पर ऐसी विदेशी निवेश की जरूरत है जो लंबे समय के किया जाए। राजन ने कहा कि एफडीआई आने से नई तकनीक और तरीके भी देश में आएंगे।

'मेक फॉर इंडिया पर भी काम करना चाहिए'

raghuram rajan ask government to should also focus on make for india

उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया पर काम करने के साथ-साथ मेक फॉर इंडिया पर भी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को जरूरत है कि सरकार महत्वकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर योजना और व्यापार करने की लागत घटाने पर जोर दे। उन्होंने कहा कि मेक फॉर इंडिया इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि दूसरे देशों की मांग कम है।

उन्होंने कहा कि देश की घरेलू बचत के जरिए ही देश की घरेलू मांग को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशक में पूर्वी एशिया का निर्यात पर आधरित है। ऐसी नीतियों के बारे में विचार किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में अमेरिका की अर्थव्यवस्‍था ऐसी है जो लगातार बदल रही है। पर दूसरे कई ऐसे देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्‍था लगातार कमजोर होती जा रही है। साथ ही उसमे अस्थिरता बनी हुई है। नीति निर्माताओं को इस बारे में भी सोच कर फैसला लेना होगा।

उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में नई तकनीक आ रही है। ऐसी तकनीक आने से कई तरह की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में मध्यम वर्ग की यूरोप और अमेरिका में चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

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