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सहारा से पैसा मिलेगा या नहीं?

Sat, 06 Apr 2013 04:02 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क/कुष्ण कुमार सिंह
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क/कुष्ण कुमार सिंह Updated Sat, 06 Apr 2013 04:02 PM IST
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question looms as will investors get back money from sahara

सहारा ग्रुप और सेबी के बीच विवाद तीन करोड़ से अधिक निवेशकों के 24,000 करोड़ रुपये को लौटाने को लेकर है।

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साधारण शब्दों में कहें तो सहारा कुछ लोगों से पैसे इस शर्त पर लेता है कि वह कुछ सालों में 'आकर्षक' रिटर्न के साथ वापस करेगा।

जब कुछ निवेशक तय समय के बाद पैसे वापस लेने जाता है तो कंपनी उसे देने में आनाकानी करती है। मामला कोर्ट में पहुंचता है।

सेबी का दखल
अगस्त, 2010 में सेबी सहारा समूह की दोनों कंपनियों (रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन) के धन जुटाने के मामले की जांच के आदेश देती है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आदेश पर रोक लगाने के बाद सेबी सुप्रीम कोर्ट पहुंचती है। 31 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट, सहारा की दोनों कंपनियों को निवेशकों से जुटाए गए रकम 15 फीसदी ब्याज के साथ तीन किस्तों में तीन महीने के अंदर लौटाने को कहती है।
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 Securities and Exchange Boardसुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
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कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट सेबी को आदेश देती है कि यदि सहारा ग्रुप पैसे वापस नहीं कर पा रही है तो उसकी संपत्ति जब्त क्यों नहीं की जाती?

अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद सेबी, सहारा समूह की दो कंपनियों और समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय व अन्य तीन निदेशकों के बैंक खाते और डिमैट खाते फ्रीज करती है। अटैच होने वाली संपत्तियों में सुब्रत राय और तीनों निदेशकों की चल व अचल संपत्ति भी शामिल है।

 Securities and Exchange Boardसहारा का पक्ष
सहारा का कहना है कि उसके कुल निवेशकों की संख्या 3.07 करोड़ हैं जिनमें से करीब 90 फीसदी निवेशकों का पैसा लौटा दिया गया है।

5,120 करोड़ रुपए की पहली किस्त के बारे में सहारा का कहना है कि इसमें से सिर्फ 2620 करोड़ रुपये दिए जाने शेष हैं और वो पहले ही बॉन्डधारकों को 19,400 करोड़ रुपए अदा कर चुका है।
 sebi
सेबी का तर्क
हाल ही में सेबी प्रमुख यूके सिन्हा ने सहारा का नाम लिए बिना कहा था कि उसके 20,000 करोड़ रुपये लौटाने के दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सेबी प्रमुख यूके सिन्हा ने कहा कि इसी तरह कुछ कंपनियां बड़े रिटर्न (कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम) के दावे के साथ पैसे जुटा रही है, जिसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 investmentनिवेशक परेशान
जब अमर उजाला ने इस विवाद में जब कुछ निवेशकों से बात की तो उन्होंने खुद को ठगा महसूस किया। बिहार के मधुबनी के रहने वाले ललन कुमार ने बताया कि उन्होंने भी सहारा की एक स्कीम में 2009 में 25,000 रुपये जमा किए। उन्हें बताया गया कि 10 साल बाद (2019) तिगुना यानी 75,000 रुपये मिलेंगे।

अचानक दिसंबर, 2012 में कंपनी कहती है कि वे अपना पैसा सहारा क्यू शॉप (रिटेल चेन) में शिफ्ट करवा लें। आपका पैसा मैच्यूरिटी पूरा होने पर ही मिलेगा। बस एक फॉर्म पर अपनी सहमति को लेकर दस्तखत कर दीजिए।

यह कंपनी की इस दलील से बिल्कुल उलट है जिसमें उसने 90 फीसदी निवेशकों को सूद सहित पैसे लौटाने की बात कही है।

sahara indiaमामला
सहारा समूह की अपने दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने रियल एस्टेट में निवेश करने के नाम पर वर्ष 2008 से 2011 के बीच परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिए करीब 2.30 करोड़ छोटे निवेशकों से 17,400 करोड़ जुटाए थे।

सितंबर, 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के समक्ष दस्तावेज जमा किए जिसके बाद सेबी ने अगस्त, 2010 में दोनों कंपनियों के जांच करने के आदेश दिए।

टाइमलाइन
नवंबर, 2010 : सहारा प्राइम सिटी का आईपीओ लटका, सेबी ने दोनों कंपनियों द्वारा निवेशकों से धन जुटाने के मामले की जांच का अंतरिम आदेश दिया। इसके बाद सहारा इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली।

दिसंबर, 2010 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेबी के आदेश पर रोक लगा दी।

जनवरी, 2011 : सेबी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को इस बात की इजाजत दी कि वह ओएफसीडी में निवेश करने वाले लोगों के नाम के साथ जांच के लिए जरूरी जो भी जानकारी चाहें, मांग सकता है।

अप्रैल, 2011 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारा ग्रुप मामले में पहले लगे स्टे को हटा दिया, साथ ही अदालत ने कंपनी के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि वह धन जुटाने की अपनी कवायद में शामिल सभी निवेशकों के बारे में पूरा विवरण सेबी को दे।

जून, 2011 : सेबी ने दोनों कंपनियों को निवेशकों का धन वापस करने का आदेश दिया।

जुलाई, 2011 : सेबी के आदेश के खिलाफ सहारा ने सैट की शरण ली।

अक्तूबर, 2011 :
सैट ने सेबी के आदेश को पुष्ट किया और उसे बरकरार रखा।

जनवरी, 2012 :
सुप्रीम कोर्ट ने सैट के आदेश पर रोक लगाई, सहारा की अपील स्वीकार की।

31 अगस्त 2012 : सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दोनों कंपनियों को निवेशकों से जुटाए गए रकम 15 फीसदी ब्याज के साथ तीन किस्तों में तीन महीने के अंदर लौटाने का आदेश दिया। इनमें 5,120 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान करना था।

26 सितंबर, 2013 : सेबी ने सहारा समूह पर न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि सहारा की जिन कंपनियों को निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया गया था वह मांगे गए सारे दस्तावेज उसे उपलब्ध नहीं करा रही हैं।

5 अक्तूबर, 2012 : सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए याचिका दायर की। सर्वोच्च अदालत ने सहारा को जमाकर्ताओं के 17400 करोड़ रुपये 15 फीसदी ब्याज की दर से लौटाने का आदेश दिया था।

सहारा के दोनों कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में न्यायालय के आदेश के अनुसार निवेशकों के धन को लौटाने के लिए प्रतिबद्धता जताई साथ ही कहा कि इस आदेश से जनता के साथ-साथ देशी एवं विदेशी बाजारों में उसकी छवि को धक्का पहुंचेगा।

19 नवंबर, 2012 : सहारा समूह की कंपनी सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन और सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन ने निवेशकों को धन लौटाने के लिए समय-सीमा बढ़ाने को याचिका दाखिल की साथ ही सैट के रजिस्ट्रार के पास धन जमा करने की अनुमति देने का अनुरोध करते हुए एक दूसरी अपील की।

हालांकि, न्यायाधिकरण द्वारा दूसरा अपील 29 नवंबर को खारिज कर दी गई। इसके बाद, दोनों कंपनियों ने सैट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

5 दिसंबर, 2012 : कंपनियों की अपील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों कंपनियों को बकाया भुगतान निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ नौ सप्ताह में कई चरणों में लौटाने का निर्देश दिए।

साथ ही सहारा समूह को निवेशकों से संबद्ध दस्तावेज 15 दिनों के भीतर सेबी को सौंपने का भी निर्देश दिया और चेतावनी दी कि धन के भुगतान पर उसके निर्देश का पालन करने में विफल रहने पर सेबी उसकी संपत्तियों को कुर्क कर देगी।

20 दिसंबर, 2012 :
सैट ने सहारा समूह की पैसा लौटाने के मामले में सेबी को निवेशकों से संबंधित दस्तावेज सौंपने की समय सीमा बढ़ाने संबंधी सहारा की याचिका खारिज कर दी।


10 जनवरी, 2013 :
सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने के फैसले पर सहारा समूह की पुनर्विचार याचिका खारिज की।

14 फरवरी, 2013 : सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ निवेशकों का पैसा लौटाने के मामले में सख्त कदम उठाते हुए इन कंपनियों और समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों के खातों पर रोक लगाने तथा अचल संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए।

25 फरवरी, 2013 :
सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को और समय देने से इनकार करते हुए फरवरी के प्रथम सप्ताह तक निवेशकों का धन लौटाने की न्यायिक आदेश का पालन नहीं करने के लिए उसे आड़े हाथों लिया।

न्यायाधीशों ने सख्त लहजे में कहा कि यदि आपने हमारे आदेशानुसार धन नहीं लौटाया है तो आपको न्यायालय में आने का कोई हक नहीं बनता है। यह समय सिर्फ इसलिए बढ़ाया गया था ताकि निवेशकों को उनका धन वापस मिल सके।

15 मार्च, 2013 : सेबी ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय की गिरफ्तारी और उन्हें देश छोड़कर बाहर जाने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर की।

सहारा समूह की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपया लौटाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर सेबी ने यह अर्जी दायर की।

26 मार्च, 2013 :
सेबी ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय और अन्य तीन शीर्ष कार्यकारियों को 8 अप्रैल तक अपनी परिसंपत्तियों, बैंक खातों और कर रिटर्न का ब्यौरा जमा कराने और 10 अप्रैल को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने को कहा।

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