तेजी से विस्तार करना चाहती है कतर एयरवेज
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भारत के 12 शहरों से उड़ान भरने वाली कतर एयरवेज भारत से अपने आर्थिक रिश्ते और प्रगाढ़ करना चाहती है। भारत और कतर के बीच इस समय हर सप्ताह 24,000 सीटों का समझौता है। कतर एयरवेज चाहती है कि यह कम से कम दोगुना हो क्योंकि इस मार्ग पर सीटों की मांग में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। यही नहीं, कंपनी भारतीय विमानन क्षेत्र में भी निवेश को तैयार है, बशर्ते उसके मनमाफिक विमानन कंपनी में निवेश का मौका मिले। हवाई जहाज में शाही सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दुनिया भर में मशहूर कंपनी कतर एयरवेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अकबर अल बकर से अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने पिछले दिनों दोहा में लंबी बातचीत की। पेश है इस बातचीत के अंश-
भारत में जबसे नई सरकार बनी है, यह दुनिया भर की कंपनियों का आकर्षण का केंद्र बन रहा है, क्या आप भी इस आकर्षण में बंध रहे हैं?
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की परिस्थितियों में परिवर्तन हुआ है, यह मैं भी देख रहा हूं। मैं भी चाहता हूं कि भारत से हमारे रिश्ते प्रगाढ़ हों।
किस लिहाज से प्रगाढ़ रिश्ता चाहते हैं, क्या सीटों की संख्या के बारे में?
आर्थिक रिश्तों की बात करें, तो भारत से हमारा बेहद बढ़िया रिश्ता है। हम भारत की आवश्यकता का 50 फीसदी से ज्यादा प्राकृतिक गैस देते हैं। रासायनिक उर्वरकों में भी यही स्थिति है। इसलिए हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच हवाई जहाज की सीटों के लिए हुए द्विपक्षीय समझौते की भी समीक्षा हो। इस समय हर सप्ताह 24,000 सीटें उपलब्ध हैं, जो कि मुझे काफी कम लगता है। जिस देश से हमारा इतना बढ़िया आर्थिक रिश्ता हो, वहां सीटों की संख्या कम से कम दोगुनी तो होनी ही चाहिए।
भारत में विमानन क्षेत्र में परिदृश्य बदल रहा है। कई विदेशी कंपनियां निवेश कर रही हैं। क्या आप भी वहां निवेश को इच्छुक हैं?
मैं भी देख रहा हूं कि वहां बदलाव की बयार बह रही है। अभी-अभी सिंगापुर एयरलाइंस ने विस्तारा एयरलाइंस को शुरू किया है। हम भी भारत में निवेश कर सकते हैं, बशर्ते हमें उचित प्लेटफार्म मिले। हम अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इस समय स्पाइसजेट की हालत खराब है। क्या आप उसमें निवेश करेंगे?
हम स्पाइसजेट में निवेश को कतई इच्छुक नहीं हैं। हमें यदि किसी भारतीय विमानन कंपनी में निवेश का मौका मिलता है तो मेरी पहली और आखिरी पसंद इंडिगो होगी। यहां तक कि एयर इंडिया में भी मैं निवेश नहीं करना चाहूंगा।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आयटा) और कई विदेशी एयरलाइनों ने भारत में शुल्क और कर की ऊंची दरों की आलोचना की है, आपको क्या लगता है?
भारत की मोदी सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। भारत में कुछ हवाई अड्डों पर शुल्क की दरें बेहद ज्यादा हैं, जो कि उसके लिए भी घातक हैं। यदि वे शुल्क ज्यादा रखेंगे तो उनकी क्षमता का अधिकतम उपयोग नहीं होगा। इसी तरह वहां एटीएफ पर भी कर की दरें काफी हैं। वहां की सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, ताकि एयरपोर्ट चार्जेज और एटीएफ पर टैक्स कम हो सके। इससे सिर्फ विदेशी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि वहां की कंपनियों को भी फायदा होगा।
भारत में आप सेवा विस्तार को सोच रहे हैं?
इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस समय भारत आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है। आप 2004 में देखें तो उस समय हमारी सेवा सिर्फ चार भारतीय शहरों में थी, वह आज बढ़ कर 12 शहरों तक पहुंच गई है। सप्ताह में वहां हमारे 95 यात्री विमान और 15 फ्रेटर जाते हैं। भारतीय बाजार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, तभी तो हमने अमृतसर, गोवा अहमदाबाद और कोच्चि जैसे छोटे शहरों पर ध्यान केंद्रित किया है। उम्मीद करता हूं कि अगले कुछ महीनों में हम कुछ और शहरों में सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगे।
आपने अपने बेड़े में दुनिया का आधुनिकतम ए 350 एक्स्ट्रा वाइड बॉडी विमान शामिल किया है। भारतीय मार्गों पर भी इस विमान को लगाएंगे?
अभी देखें, तो हमने भारतीय मार्गों पर बेहतरीन विमान लगा रखा है। दिल्ली-दोहा मार्ग पर हम बोइंग 787 ड्रीमलाइनर भेजते हैं। इसमें भी यात्रियों को वही सेवा मिलती है जो ए 350 में मिलेगी। हमने ए 350 श्रेणी के 80 विमानों का ऑर्डर दिया है। जैसे जैसे हमें इसकी डिलीवरी मिलती जाएगी, हम पुराने विमान को इससे रिप्लेस करते जाएंगे। जाहिर है कि भारतीय मार्ग पर भी ऐसा ही होगा। बस डिलीवरी मिलने दीजिए।