{"_id":"fe22c6d6-d38e-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"property-are-openly-sold-without-tds","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीडीएस बगैर धड़ल्ले से बिक रही हैं प्रॉपर्टी","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
टीडीएस बगैर धड़ल्ले से बिक रही हैं प्रॉपर्टी
नई दिल्ली/अजीत सिंह
Updated Thu, 13 Jun 2013 12:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भले ही 50 लाख रुपये से महंगी प्रॉपर्टी की खरीद पर 1 फीसदी टीडीएस काटना अनिवार्य हो गया हो लेकिन सरकार ने इस टैक्स से बचने के चोर दरवाजे भी खोल रखे हैं।
विज्ञापन
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के वक्त टीडीएस कटौती का सबूत देना जरूरी नहीं है, जिसके चलते टीडीएस काटे बगैर भी धड़ल्ले से महंगी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हो रही है। टीडीएस कटौती की प्रक्रिया भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने से खरीदार उलझन में हैं।
विज्ञापन
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टीडीएस कटौती के आधार पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री की अनिवार्यता नहीं होने की पुष्टि की है।
विज्ञापन
दिल्ली के उत्तरी जिले में पीतमपुरा के सब-रजिस्ट्रार वीरेंद्र डागर ने बताया कि उन्हें प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के वक्त टीडीएस कटौती का प्रमाण मांगने संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
50 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री बिना टीडीएस का सबूत मांगे की जा रही है। देश के बाकी राज्यों में भी यही स्थिति है।
कंसल्टिंग फर्म अर्नस्ट एंड यंग के टैक्स पार्टनर गौरव कार्णिक का कहना है कि रजिस्ट्री के वक्त टीडीएस कटौती का सबूत मांगे बगैर इस नियम का पूरी तरह पालन होना मुश्किल है।
प्रॉपर्टी मार्केट के जरिए फैलते कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने खरीदारों पर टीडीएस कटौती का यह नया बोझ डाला है, जो गत एक जून से लागू हो गया है।
रियल एस्टेट डेवलपर सुपरटेक के सीएमडी आरके अरोड़ा का कहना है कि टीडीएस कटौती के नियम पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। इससे सिर्फ खरीदारों का झंझट बढ़ेगा।
पार्श्वनाथ डेवलपर्स के चेयरमैन प्रदीप जैन के अनुसार, टीडीएस कटौती की जिम्मेदारी खरीदार के ऊपर होने से उसके लिए टीडीएस काटने, ई-फाइलिंग, टीडीएस जमा करने और विक्रेता को टीडीएस प्रमाण-पत्र जारी करने का काम बढ़ जाएगा।
खरीदार पर पड़ेगा बोझ
खरीदार टीडीएस काटकर इसका प्रमाण-पत्र विक्रेता को देगा, जिसके आधार पर वह टैक्स क्रेडिट ले सकता है। इस प्रकार एक फीसदी टीडीएस का बोझ खरीदार या विक्रेता किसी की जेब पर नहीं पड़ना चाहिए। लेकिन कंसल्टिंग फर्म जेएलएल इंडिया के अध्यक्ष अनुज पुरी का कहना है कि यह बोझ आखिरकार खरीदार को ही उठाना होगा।
साझी प्रॉपर्टी पर स्पष्ट नहीं नियम
गत एक जून से टीडीएस कटौती का प्रावधान लागू होने के बावजूद इसे लेकर खरीदारों में भ्रम बना हुआ है। पहले टीडीएस कटौती के लिए खरीदारों को टीएएन नंबर लेना जरूरी था, लेकिन अब आयकर विभाग ने सिर्फ पैन नंबर के आधार पर टीडीएस जमा करने की छूट दी है।
टैक्स मामलों के विशेषज्ञ सीए बिमल जैन का कहना है कि साझे या बैंक से कर्ज लेकर किश्तों पर खरीद जा रही 50 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर टीडीएस कटौती के नियम स्पष्ट नहीं हैं।