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कृषि में रिसर्च को बढ़ावा, बढ़ेगा सरकारी बजट
नई दिल्ली/विजय गुप्ता
Updated Sun, 13 Jan 2013 07:55 PM IST
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जिन कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत बीजों और नवीनतम तकनीक के जरिए अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन करने का कारनामा कर दिखाया, उन्हें ही सीमित दायरे में रखने का इरादा रखने वाली सरकार के सपनों पर पानी फिर गया है।
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कृषि की स्थायी समिति ने अनुसंधान कार्यों के लिए बजट में की गई कटौती को गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ सरकार को कड़ी फटकार लगाई है बल्कि बजट में जल्द बढ़ोतरी करके उसकी सूचना समिति को देने का आदेश भी दिया है। समिति की लताड़ के बाद अब सरकार अनुसंधान कार्यों के लिए बजट राशि बढ़ाने में जुट गई है।
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कृषि मंत्रालय इन दिनों वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान कृषि अनुसंधान की प्रमुख संस्थाओं के बजट में बढ़ोतरी पर फिर से विचार कर रहा है। यह मंथन संसद की स्थायी समिति की उस रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है, जिसमें उसने सरकार से अनुसंधान संस्थानों के बजट में बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।
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संसद की स्थायी समिति ने शीतकालीन सत्र में संसद में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में इस मामले का उल्लेख भी किया था। रिपोर्ट में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वार्षिक बजट में कटौती किए जाने से संसद की स्थायी समिति ने नाराजगी जाहिर की थी। जवाब में कृषि मंत्रालय ने समिति को आश्वासन दिया है कि संस्थानों के बजट में बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है।
रिपोर्ट में समिति ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन के तदर्थ रुख की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों के बजट में कटौती किए जाने से प्रमुखता वाले कृषि क्षेत्र के अनुसंधान पर असर पड़ेगा। समिति ने संस्थानों को दिए जाने वाले बजट की विसंगतियों को भी उजागर किया और इसे वित्तीय प्रबंधन का तदर्थ नजरिया करार करते हुए उन संस्थानों के बजट में तुरंत बढ़ोतरी को कहा, जिनके बजट में कटौती कर दी गई है।
आईसीएआर के लिए शुरू में 4719.68 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। बाद में इसे घटा कर 3220 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस कटौती के कारण परिषद के फसल विज्ञान विभाग का बजट 670.70 करोड़ रुपये से घट कर 460 करोड़ रुपये रह गया।
इसके अलावा नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लान जेनेटिक्स रिर्सोस का वार्षिक बजट भी लगभग अस्सी फीसदी तक कम हुआ। बीज अनुसंधान निदेशालय का 71 प्रतिशत और केंद्रीय कॉटन अनुसंधान संस्थान का 48 प्रतिशत बजट कम हुआ है।