फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   production in ful swing in RNIL vishakhapattnam plant

RNIL के विशाखापत्तनम प्लांट में उत्पादन शुरू

Tue, 18 Nov 2014 09:15 AM IST
नई दिल्ली /ब्यूरो
नई दिल्ली /ब्यूरो Updated Tue, 18 Nov 2014 09:15 AM IST
विज्ञापन
production in ful swing in RNIL vishakhapattnam plant
हुदहुद तूफान से बुरी तरह प्रभावित आरआईएनएल के विशाखापत्तनम इस्पात कारखाने में रिकॉर्ड समय में शत-प्रतिशत उत्पादन शुरू हो गया है। हुदहुद तूफान के बाद कैसे बदलाव हुआ, इस मसले पर अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने आरआईएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पी. मधुसूदन से विस्तृत बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :-
विज्ञापन


हुदहुद तूफान के बाद विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में कितना उत्पादन हो रहा है?

हमारा लगभग 100 फीसदी उत्पादन शुरू हो गया है। ये तो आप जानते ही हैं कि तूफान के बाद हमारी सभी यूनिटें ठप पड़ गई थीं। पूरे कारखाने की छत उड़ गई थी। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारी करीब एक लाख क्यूबिक मीटर की रूफ शीटिंग उड़ गई थी। जब तूफान थमा तो सबसे पहले हमने वहां-वहां रूफ शीट डालनी शुरू की जहां काम पहले शुरू होना था। उसके बाद अपने कैप्टिव पावर प्लांट को शुरू करने पर ध्यान दिया।
विज्ञापन


इस समय क्या स्थिति है?

हमारा काम चल रहा है, साथ ही उत्पादन भी शुरू हो गया है। हमारे प्लांट में 4 कोक ओवन बैटरी यूनिट 100 फीसदी क्षमता उपयोग में चल रहे हैं, इसे हमने 19 अक्तूबर को ही चालू कर लिया था। 23 अक्तूबर से हमारा ब्लास्ट फर्नेंस भी चालू हो गया। उसके बाद स्टील मेल्टिंग प्लांट को शुरू किया गया। इस समय तो स्टील मेल्टिंग प्लांट भी पूरी क्षमता में चलने लगा है। हमारी तीनों रोलिंग मिल चालू हैं। एक तरह से कहा जाए तो हमारा कारखाना पूरी क्षमता से चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तूफान के समय कहा जा रहा था कि आरआईएनएल को करीब 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। क्या है असलियत?
नुकसान की बात करें तो इसे हमने तीन हिस्सों में बांटा है। पहला हिस्सा है भवन, प्लांट और अन्य इंस्टालमेंट में क्षति का। इसके रिपेयर में करीब 125 करोड़ रुपये का खर्च बैठ रहा है। नुकसान का दूसरा हिस्सा रहा वाटर रिजर्वेयर का, जिसका करीब छह किलोमीटर का तटबंध नष्ट हो गया। इसे ठीक करने में करीब 25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। तीसरा नुकसान पेड़-पौधों का है। हमारे प्लांट में खूब पेड़-पौधे थे जो कि तूफान में उखड़ गए। वहां फिर से पौधे रोपे जाएंगे और इसमें जितना खर्च लगेगा, उतना तो उखड़े पेड़ बेचने से आ गया। मतलब, कुल 150 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उसमें भी फिजिकल एसेट के नुकसान का 125 करोड़ रुपये तो हमें बीमा कंपनी से मिल जाएगा क्योंकि हमने मेगा इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी है। बीमा कंपनी से कुछ और राशि मिलेगी क्योंकि हमारी पालिसी में एक शर्त है कि अगर किसी कारणवश 14 दिन से ज्यादा उत्पादन ठप रहता है तो उसका हर्जाना मिलेगा। इसके लिए हम क्लेम तैयार करवा रहे हैं।

मतलब आपका बेहद कम नुकसान हुआ?
यदि मौद्रिक रूप से देखा जाए तो बेहद कम, क्योंकि हमने इसके लिए पहले से इंतजाम कर लिया था। तूफान की पहले से सूचना मिल गई थी, इसलिए एक भी कर्मचारी हताहत नहीं हुआ।


तूफान की वजह से आपके विस्तार कार्य पर कोई असर?

विस्तार कार्य के लिए जिस तरह से हमने योजना बनाई थी, वैसे ही काम हो रहा है। चालू वित्त वर्ष के लिए हमने 1,534 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, वह समय से पूरा होगा। इससे हमारी वैल्यू एडेड स्टील बनाने की क्षमता में वृद्धि हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed