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कमजोर पड़ी आईआईपी, आरबीआई पर दरें घटाने का दबाव

Mon, 12 Nov 2012 08:23 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Mon, 12 Nov 2012 08:23 PM IST
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pressure on rbi to decrease interest rates

कारखाना क्षेत्र के लचर प्रदर्शन के चलते सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की दर (आईआईपी) नकारात्मक 0.4 फीसदी के स्तर पर रही, जबकि अनुमान जताया जा रहा था कि यह अगस्त के 2.7 फीसदी (संशोधित 2.3 फीसदी) से बढ़ कर 2.9 फीसदी पर पहुंच जाएगी। आईआईपी में आई इस गिरावट ने अर्थव्यवस्था में नरमी कायम रहने का स्पष्ट संकेत दिया है। इससे रिजर्व बैंक पर विकास दर बढ़ाने के लिए ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ गया है। उद्योग जगत ने भी निराशाजनक आंकड़ों का हवाला देते हुए आरबीआई से मौद्रिक नीति में नरमी दिखाने का आग्रह किया है।

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सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में कारखाना क्षेत्र (मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर) की विकास दर घट कर फीसदी से घटकर -1.5 फीसदी पर आ गई। पिछले साल सितंबर में यह 3.1 फीसदी के स्तर पर थी। अप्रैल-सितंबर तिमाही के दौरान कारखाना क्षेत्र में उत्पादन 0.4 प्रतिशत घटा, जबकि बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 5.5 प्रतिशत बढ़ा था। इसी तरह कैपिटल गुड्स सेक्टर की विकास दर भी सिकुड़कर -12.2 फीसदी पर आ गई है। सितंबर 2011 में यह -6.5 फीसदी के स्तर पर रही थी।
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अर्थव्यवस्था की दृष्टि से सबसे अहम इन दो सेक्टरों में गिरावट के बीच हालांकि खनन (माइनिंग) सेक्टर में अच्छी राहत मिली है। सितंबर महीने में माइनिंग सेक्टर की विकास दर बढ़कर 5.5 फीसदी पर पहुंच गई है। सितंबर 2011 में यह-7.5 फीसदी के स्तर पर दर्ज की गई थी। टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर) की विकास दर सालाना आधार पर 8.9 फीसदी से घटकर -1.7 फीसदी पर रही। सितंबर में कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स उत्पाद क्षेत्र की दर भी सालाना आधार पर 2.7 फीसदी से घटकर 1.1 फीसदी पर रही।
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आईआईपी के निराशाजनक आंकड़ों के अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत ने निराशा जताते हुए सरकार व रिजर्व बैंक की ओर से इसमे सुधार लाने के लिए कदम उठाने की जरूरत जताई है। उद्योग जगत का कहना है कि अब समय आ गया है कि आरबीआई महंगाई से ध्यान हटा कर विकास दर को मजबूत करने के लिए मूल दरों में कटौती करे। सीआरआर में अब तक की गई कटौतियों से बैंकिंग तंत्र में अतिरिक्त नकदी जरूर आई, पर विकास दर पर इसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। इसलिए आरबीआई को रेपो रेट व रिवर्स रेपो रेट घटानी चाहिए, ताकि कर्ज सस्ता होने पर उद्योग जगत के सामने खड़ा पूंजी का संकट हल हो सके।

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