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एसएमई को समय से भुगतान दिलाने की तैयारी
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Mon, 25 Feb 2013 06:50 PM IST
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छोटे और मझोले कारोबारियों को तय समय में भुगतान मिलने का रास्ता आने वाले दिनों में खुल सकता है। इसके लिए सरकार मौजूदा एमएसएमईडी एक्ट- 2006 में बदलाव करने की कवायद कर रही है। जिसके तहत इस तरह के उपाय किए जा सकते हैं कि बड़ी कंपनियों द्वारा तय समय पर छोटे कारोबारियों को भुगतान न करने पर आय के प्रावधान में सख्ती की जा सके। साथ ही बड़ी कंपनियों की बैलेंसशीट में ब्याज सहित राशि चुकाने का स्पष्ट उल्लेख करने के प्रावधान को भी सही तरीके से अमल में लाया जा सके।
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एमएसएमईडी एक्ट- 2006 के मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक छोटे और मझोले कारोबारियों से खरीदारी करने वाली कंपनियों को 45 दिन के अंदर उनका भुगतान करना चाहिए। हालांकि यह प्रावधान होने के बावजूद छोटे और मझोले कारोबारियों को भुगतान की अवधि 100-120 दिन तक पहुंच जाती है। मौजूदा आर्थिक सुस्ती के दौर में यह स्थिति बनी हुई है।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि मौजूदा कानून में यह प्रावधान तो है कि कंपनियों को 45 दिन के अंदर छोटे और मझोले कारोबारियों का भुगतान करना चाहिए। लेकिन, कानून में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है कि कंपनियां अगर तय समय पर भुगतान नहीं करती हैं, तो क्या कार्रवाई की जा सकती है।
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इसे देखते हुए मंत्रालय जरूरी संशोधन की रूपरेखा बना रहा है। अधिकारी के अनुसार, इस संबंध में कॉरपोरेट अफेयर्स मामलों के मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर प्रावधानों में अहम बदलाव करने की जरूरत है। जैसे कि कंपनियों को अपनी बैलेंस शीट में यह दिखाना पड़े कि वह एमएसएमई क्षेत्र की कंपनियों को कितने समय में भुगतान कर रही हैं। देरी से भुगतान करने पर वह ब्याज सहित भुगतान कर रही हैं या नहीं।
इसी तरह, वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर यह प्रावधान करने की कोशिश है कि जिन कंपनियों ने तय समय में छोटे और मझोले कारोबारियों का भुगतान नहीं किया है, उनके उस उत्पाद के जरिए हुई आय को कंपनी की आय में शामिल न किया जाए। अधिकारी ने बताया कि अभी यह प्रस्ताव अंतिम रूप में नहीं है। इसे संबंधित विभागों की सहमति के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय छोटे और मझोले कारोबारियों की कई समस्याओं को दूर करने के लिए इस समय मौजूदा एमएसएमईडी एक्ट- 2006 में संशोधन प्रस्ताव के लिए काम कर रहा है। जिसमें निवेश सीमा और समय पर भुगतान पहुंचाने के प्रमुख संशोधन करने की तैयारी है।