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प्रदेश में समग्र आलू नीति बनाने की तैयारी

Sat, 15 Dec 2012 11:19 PM IST
फर्रुखाबाद/चंद्रभान यादव
फर्रुखाबाद/चंद्रभान यादव Updated Sat, 15 Dec 2012 11:19 PM IST
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preparation of policy making in state for potatoes
उत्तर प्रदेश सरकार समग्र आलू नीति बनाने जा रही है। सरकार के निर्देश पर उद्यान विभाग मसौदा तैयार करने में जुटा है। देश में पहली बार समग्र आलू नीति बनाई जा रही है। इससे आलू किसानों को काफी राहत मिलेगी। उन्हें आलू खरीद मूल्य से लेकर विपणन, प्रसंस्करण आदि के मामले में भी कानूनी मदद मिल सकेगी। आलू व्यापारी भी फायदे में रहेंगे। मार्च 2013 तक यह नीति लागू हो जाने की उम्मीद है।
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दूनियाभर में सबसे ज्यादा आलू चीन पैदा करता है। आलू उत्पादन के मामले में पूरी दुनिया में भारत की हिस्सेदारी करीब 36 मिलियन मिट्रिक टन के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत में पैदा होने वाले आलू में करीब 33 फीसदी योगदान उत्तर प्रदेश का है। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल और तीसरे पर बिहार है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी का आंकड़ा पार कर सकती है। इसके बाद भी अभी तक भारत में आलू के संबंध में कोई सरकारी नीति नहीं है।

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सर्वाधिक उत्पादन के बाद भी उत्तर प्रदेश के आलू किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं और आत्महत्या करने को विवश हैं। आलू व्यापारियों और आलू किसानों के  दर्द को देखते हुए प्रदेश सरकार ने समग्र आलू नीति बनाने का फैसला किया है। इसके लिए उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया है। उद्यान विभाग कार्ययोजना बनाने में जुटा है। आलू उत्पादक देश चीन, रूस, यूक्रेन की आलू नीति का अध्ययन भी कराया गया है।
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इन देशों के आलू किसानों को खुशहाल बनाने के लिए सरकार की नीतियां किस तरह से कारगर हैं, इसका भी अध्ययन किया जा रहा है। वहां की तमाम परिस्थितियों और उत्तर प्रदेश की स्थितियों में मिलान कर नई नीति तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि मार्च से पहले समग्र आलू नीति लागू कर दी जाएगी। उपनिदेशक आलू धर्मेंद्र नाथ पांडेय की मानें तो मसौदा करीब-करीब तैयार हो चुका है। विभिन्न चरणों में किसानों, व्यापारियों, विशेषज्ञों के सुझाव लेने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे आलू किसानों के साथ ही व्यापारियों को भी फायदा मिलेगा।


क्या होगा फायदा
मसौदे के मुताबिक समग्र आलू नीति लागू होने से आलू किसानों के साथ ही आलू व्यापारियों को भी फायदा मिलेगा। इससे पहले से चल रही कोल्ड स्टोरेज नीति का कड़ाई से पालन कराया जा सकेगा। किसानों को कम लागत में अधिक पैदावार हासिल करने की तकनीक बताई जाएगी। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाया जाएगा। लागत की अपेक्षा मूल्य तय करने में सरकार का हस्तक्षेप होगा। अभी तक सीधे-सीधे व्यापारी मूल्य तय करते रहे हैं। आयात-निर्यात के संबंध में भी पुख्ता कार्ययोजना तैयार हो सकेगी। आलू के  स्थानीय विपणन, प्रसंस्करण आदि भी इस नीति में शामिल होने से आलू का किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा।

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