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ऊर्जा नीति को देना होगा नया रूप: प्रणब

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Mon, 15 Oct 2012 08:15 PM IST
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pranab says new energy policy must follow
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आठ प्रतिशत की दर से वृद्धि लक्ष्य हासिल करने के लिए ऊर्जा मांग के बेहतर प्रबंधन की अपील करते हुए कहा कि ऊर्जा संसाधनों की कमी को देखते हुए ऊर्जा नीति को नया रूप देने की जरूरत है। ग्लोबल हालात का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम ग्लोबल मूल्यों के अनुरूप रखना उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के हित में होगा।
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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आयोजित पैट्रोटेक 2012 सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 1995 में पहला पेट्रोटेक सम्मेलन आयोजित किया गया और उस समय भी भारतीय अर्थव्यवस्था बडे़ बदलाव से गुजर रही थी तथा अब भी भारतीय ऊर्जा क्षेत्र महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है।

उन्होंने कहा कि 120 करोड़ से अधिक आबादी वाले इस विकासशील देश का तेल आयात बिल 150 अरब डॉलर को पार कर जाता है। आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है और अभी मांग की 75 प्रतिशत आपूर्ति आयात पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में मांग में बढ़ोतरी हो रही और संसाधन सीमित होने से ऊर्जा नीति को नया रूप देने की आवश्यकता है। आगामी शताब्दी में धीरे-धीरे यह बदलाव होगा, लेकिन इसमें अभी बदलाव की जरूरत है।

उन्होंने नई प्रौद्योगिकी विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पूरे उर्जा क्षेत्र में बदलाव की महती जरूरत है। इसके लिए सभी को मिलकर काम करने और प्रभावी योजना और भारी निवेश की आवश्यकता होगी। देश में हाल के वर्षों में तेल एवं गैस के नए भंडारों की खोज हुई है और सरकार वर्ष 1997-98 में नयी उत्खन्न लाइसेंस नीति शुरू करने के बाद से ही इसे प्रोत्साहित कर रही है। इसमें 14 अरब डॉलर का निवेश हुआ है और इससे 87 तेल एवं गैस क्षेत्र का पता चला है।

मुखर्जी ने कहा कि पिछले दशक में भारतीय तेल एवं गैस उद्योग के घरेलू उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। रिफाइनरी क्षेत्र में क्रांति आई है और भारत पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। देश की रिफाइनरी क्षमता 21.5 करोड टन वार्षिक है, जिसमें से छह करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात होता है और उससे 60 अरब डॉलर की राशि मिलती है। भारतीय निर्यात में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय तेल उद्योग बेहतर गुणवत्ता के ईंधन उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम है। तेल उद्योग ने प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम किया है और प्राकृतिक गैस को उपलब्ध कराने के लिए देश के 10 राज्यों में 776 सीएनजी स्टेशनों के माध्यम से 17 लाख लोगों को इसकी आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान में दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सीएनजी पर निर्भर है। इसके अतिरिक्त तेल कंपनियां 19 लाख लोगों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हाइड्रोजन क्षेत्र के सामने बहुत चुनौतियां हैं, लेकिन पिछले अनुभव और सही दूरगामी फैसलों से इनसे निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि विशिष्ट परिस्थितियों के लिये कम खर्च वाली उन्नत और नवीनीकृत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक स्वास्थ्य और व्यवहार्य हाइड्रोकार्बन क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था के विकास में बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है। राष्ट्रपति ने घरेलू तेल और गैस उद्योगों का आह्वान किया कि वे अपने कारोबार से संबंधित फैसले लेते समय सतत विकास के लक्ष्य को सामने रखें और ऐसी नीतियां बनाएं, जिनमें सुरक्षा, पर्यावरण और लोगों के हित शामिल हों।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों के मौजूदा रुख को देखते हुए इनके मूल्यों की ग्लोबल मूल्यों के अनुरूप रखना उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के हित में होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के लिए कृत संकल्प है।
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