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बिजली दरों में इजाफा चाहती हैं कंपनियां
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
Updated Thu, 16 Oct 2014 08:15 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 214 कोल ब्लॉकों को रद्द किए जाने से उपजी स्थिति से निपटने के लिए जहां सरकार अभी तक नीतिगत उपाय तलाशने में जुटी है।
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वहीं, बिजली कंपनियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि अन्य स्रोतों से कोयले की खरीद पर अतिरिक्त लागत का व्यय और कोल लिंकेज इंड यूज प्रोजेक्ट्स (ईयूपी) पर कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने की भरपाई के लिए बिजली दरों में बदलाव करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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यदि एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स (एपीपी) दबाव बनाए रखता है और भारत सरकार उन्हें दरों में बदलाव की अनुमति दे देती है, तो देशभर के लाखों उपभोक्ताओं को बिजली दरों में बढ़ोतरी का आर्थिक बोझ सहना पड़ेगा।
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एपीपी का तर्क है कि सरकार की मंजूरी मौजूदा स्थिति को संभाल सकती है। क्योंकि, कोर्ट ने कोल ब्लॉकों और उनके आवंटन को अवैध घोषित कर दिया है और यदि बिजली कंपनियों या अन्य इकाइयों को भविष्य में कोल ब्लॉकों की नीलामी में शामिल होने या अन्य स्रोतों से कोयला खरीद पर अतिरिक्त फंड की जरूरत के चलते नुकसान होता है, तो उपभोक्ताओं को क्यों उस चीज के लिए जिसे कोर्ट ने अवैध ठहराया है, अपनी जेब से भुगतान करना चाहिए।
हालांकि, ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि बिजली कंपनियों को दरों में बदलाव की अनुमति सरकार शायद ही देगी। इस मसले को बेहतर समाधान के लिए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के ऊपर छोड़ देना अच्छा है।
एपीपी का कहना है कि अधिकांश ईयूपी को अन्य वैकल्पिक स्रोतों से कोयला खरीदने के लिए बाध्य किया जाएगा। इससे प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनियों को वैकल्पिक लागत पर कोयला खरीदने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। एपीपी ने कहा है कि वैकल्पिक स्रोतों से कोयला खरीदने पर खर्च की गई किसी भी अतिरिक्त लागत का बोझ दरों पर निश्चित रूप से डालना चाहिए ताकि बिजली कंपनियों के हित सुरक्षित रह सके। इसके अलावा एपीपी ने कोर्ट द्वारा रद्द किए कोल ब्लॉकों से लिंक्ड ईयूपी पर लगाई गई अतिरिक्त लेवी के बोझ को दरों पर डालने का सुझाव दिया है।
रद्द किए गए 214 कोल ब्लॉकों के निराकरण या नीलामी के लिए सरकार अभी तक आधिकारिक योजना पेश नहीं कर सकी है। रिपोर्टों के मुताबिक निरस्त कोल ब्लॉकों को सीआईएल अपने अधिकार में लेकर अंतिम नीलामी होने तक उत्पादन जारी रखेगी। इसको ध्यान में रखते हुए एपीपी ने बिजली क्षेत्र और स्टील एवं सीमेंट जैसे अन्य क्षेत्रों के लिए कोल ब्लॉकों की खंडों में नीलामी किए जाने की आवश्यकता जताई है।
एपीपी का कहना है कि बिजली क्षेत्र की मांग और खुदरा कीमत रेगुलेटेड है। यदि बिजली की लागत में थोड़ा भी बदलाव होता है, तो कंपनियों के सामने बिजली की खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा होगी। ऐसे में बिजली सेक्टर के लिए नीलामी प्रक्रिया अलग से की जानी चाहिए।