बिजली दरों को लेकर अब नहीं चलेगी राजनीति
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गोयल के संकेतों से साफ है कि घाटे में चल रहे विद्युत बोर्ड को खुद को आर्थिक रुप से टिकाउ बनाने के कदम उठाने होंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली दरों को लेकर वोटरों को लुभाने वाली राजनीति से निपटना ऊर्जा मंत्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। इस संबंध में शुक्रवार को केंद्र और राज्यों के विद्युत नियामकों के साथ केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बैठक की।
ऊर्जा मंत्री ने लागत आधारित टैरिफ तय करने की दी सलाह सूत्रों के अनुसार बैठक मेंप्रमुख रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि घाटे से जूझ रहे राज्य विद्युत बोर्ड को आर्थिक रूप से खुद मजबूत बनना होगा। यानी केंद्र सरकार राज्य विद्युत बोर्डों को आर्थिक पैकेज देने के पक्ष में नही है। बैठक में इसके अलावा टैरिफ तय करने के समय में कमी लाने और अपीलीय प्राधिकरण के फैसलों आदि पर भी चर्चा की गई। ऊर्जा मंत्री अपने बिजली सुधार एजेंडे में प्रमुख रूप से देश में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशनल प्रणाली को विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।
गैस कीमतों को लेकर रंगराजन फार्मूलों पर सहमति नहीं गैस कीमतें तय करने पर ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल का मानना है कि इस संबंध में सब पहलुओं पर विचार करने की जरूरत है। रंगराजन फार्मूलें में कई सारी कमियां हैं। कीमतें तय करते वक्त घरेलू बाजार में गैस की कीमत, फर्टिलाइजर और बिजली क्षेत्र की जरूरतों को भी ध्यान रखना जरूरी है। फार्मूला तय करने में जापान के आयात को तय नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योकिं जापान गैस का आयातक देश हैं, वह ट्रेडर नहीं है। रंगराजन फार्मूले के आधार पर गैस कीमतों को एक अप्रैल से लागू किया जाना था, लेकिन चुनाव आचार संहिता को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी एक जुलाई तक टल गई थी। महंगाई बढ़ने के खतरे को देखते हुए सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने भी इसे तीन महीने के लिए टाल दिया है।