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आसान होगा नेपाल संग बिजली कारोबार

Fri, 26 Sep 2014 08:49 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 26 Sep 2014 08:49 AM IST
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power business will be easier with Nepal

भारत और नेपाल के बीच समझौते के लिए रास्ता साफ करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने इंडिया-नेपाल इलेक्ट्रिक पावर ट्रेड और ग्रिड ट्रांसमिशन एग्रीमेंट को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने बुधवार देर रात समझौते को मंजूरी दी।

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इस समझौते से नेपाल और भारत के बीच इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन, ग्रिड कनेक्टिविटी और पावर ट्रेड की सुविधा को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। मौजूदा समय में नेपाल भारत से सालाना 200 मेगावाट बिजली का आयात करता है। मौजूदा समय में नई सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण हो रहा है। इससे अगले दो वर्ष में ट्रांसमिशन क्षमता दोगुनी हो जाएगी। यह समझौता नेपाल में भविष्य में जल विद्युत संयंत्रों से पैदा होने वाली सरप्लस बिजली के आयात को लेकर रूपरेखा भी मुहैया कराएगा।
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समझौते से भारतीय कंपनियों के लिए न सिर्फ सीमा के दोनों तरफ ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट में भागीदारी का रास्ता खुलेगा बल्कि इससे भारतीय कंपनियां नेपाल में जल विद्युत के विकास में सक्रिय पार्टनर भी बन सकेंगी। इस समझौते को लेकर दस्तावेज तैयार करने की शुरुआत 14 सितंबर 2014 में की गई थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त 2014 की नेपाल यात्रा में दोनों देशों के बीच बनी सहमति का नतीजा था। उस समय तय किया गया था कि पावर ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत को 45 दिन के अंदर अंतिम रूप दिया जाएगा।
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इसी तरह से नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले मंत्रिमंडल ने अगले पांच वर्ष की अवधि में भारत और अमेरिका के बीच गैस हाइड्रेट्स के क्षेत्र में सहयोग के लिए आपसी समझौते को भी मंजूरी दी है। गैस हाइड्रेट्स के क्षेत्र में यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी (यूएसडीओई) के साथ सहयोग से नेशनल गैस हाइड्रेट प्रोग्राम (एनजीएचपी) और डीओई वैज्ञानिक डाटा कलेक्शन, विश्लेषण और पायलट प्रोडक्ट टेस्टिंग के लिए साइट की पहचान में सक्रिय भागीदारी कर सकेंगे।

यह पहले से नियोजित एनजीएचपी एक्सपेडिशन-02 और 03 के तहत पूर्वी, पश्चिमी और अंडमान में गहरे जल क्षेत्र में किया जाएगा। दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी सूचनाओं के आदान-प्रदान से भारतीय वैज्ञानिकों की भारतीय गैस हाइड्रेट्स के बारे में अपनी समझ को बेहतर बनाने और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम से खुद को अपेडट करने में मदद मिलेगी। गैस हाइड्रेट्स को प्राकृतिक गैस का व्यापक संसाधन माना जा रहा है।


माना जाता है कि यह समुद की तलछटी में पाई जाती है। वैश्विक स्तर पर गैस हाइड्रेट को लेकर शोध एवं विकास के स्तर पर काम चल रहा है और अभी तक इसका व्यावसायिक दोहन नही शुरू हुआ है। अनुमान है कि भारत में 1894 टीसीएम गैस हाइड्रेट है। इसके भंडार पश्चिमी, पूर्वी और अंडमान के तटीय इलाके में हैं।

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