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पावर सेक्टर में सुस्ती भेल के लिए बुरी
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Sep 2014 09:08 AM IST
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बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सुस्ती और कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन का असर बिजली के भारी उपकरण बनाने वाली कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) पर भी पड़ रहा है। भेल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) बीपी राव ने कहा कि इससे कंपनी की निवेश और विस्तार संबंधी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
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कंपनी की सालाना आम बैठक (एजीएम) में राव ने बताया कि भेल रेलवे ट्रांसपोर्टेशन, सौर (सोलर) ऊर्जा और बिजली के ट्रांसमिशन के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के बारे में सोच रही थी। इसके तहत महाराष्ट्र में 480 मेगावाट का सोलर पीवी सिस्टम बनाने वाली इकाई स्थापित करने की योजना थी। पावर सेक्टर के मौजूदा हालात का असर कंपनी की इन योजनाओं पर पड़ता दिख रहा है।
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उन्होंने बताया कि भेल की योजना नए बिजनेस मॉडल को अपनाते हुए अन्य कंपनियों के साथ साझेदारी में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार का विस्तार करने थी। कंपनी ऐसा करके अन्य क्षेत्रों में मौजूद कारोबारी संभावनाओं का लाभ उठाते हुए अपने कारोबार को बढ़ाना चाहती थी।
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उन्होंने बताया कि कंपनी लोकोमोटिव के क्षेत्र में अपनी क्षमता का विस्तार करना चाहती है। इसके अलावा ट्रांसफार्मर क्षेत्र में भी अपने कारोबारी दायरे को बढ़ाते हुए 765 और 1,200 केवी के ट्रांसफार्मर विकसित करना चाहती है। ऐसे ही अन्य कदमों के जरिए भेल अपनी बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाने के बारे में सोच रही है। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की जानकारी देते हुए राव ने बताया कि चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बावजूद भेल ने वित्त वर्ष 2013-14 में 3,461 रुपये का मुनाफा कमाया और उसका टर्नओवर 40,338 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन 9 फीसदी रहा और कंपनी ने 693 करोड़ रुपये के कुल लाभांश की घोषणा की है। यह कंपनी की कुल चुकता पूंजी का 141.2 फीसदी है, जिसमें 65.5 फीसदी का अंतरिम लाभांश भी शामिल है। अपने इस प्रदर्शन के जरिए कंपनी ने मुश्किल स्थितियों में भी 1976-77 से जारी शेयरधारकों को लाभांश देने की परंपरा को जारी रखने में कामयाब रही है।
उन्होंने बताया कि पावर सेक्टर की प्रतिकूल दशाओं के बीच भी भेल बीते वर्ष घरेलू और ग्लोबल स्तर पर 28,007 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल करने में सफल रही। इसके साथ ही भेल की बाजार हिस्सेदारी भी 2012-13 के 68 फीसदी से बढ़कर 2013-14 में 72 फीसदी पर पहुंच गई है।