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पीएफ डिफाल्ट की 7 साल में ही करनी होगी जांच

Fri, 07 Dec 2012 09:00 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Fri, 07 Dec 2012 09:00 PM IST
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PF default case must be examined in 7 years

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) खाते को नियमित रखने में विफल नियोक्ताओं के खिलाफ अब जांच शुरू करना बहुत मुश्किल होगा। ईपीएफओ ने ऐसे मामलों की जांच के लिए समय सीमा 7 साल निर्धारित कर दी है। यानी किसी भी कर्मचारी को अब अपने पीएफ खाते से संबंधित नियोक्ता के खिलाफ कोई भी शिकायत किसी भी रूप में नौकरी से बाहर होने (सेवानिवृत्त होने अथवा नौकरी बदलने) के सात साल के भीतर करनी होगी। 

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केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त आरसी मिश्रा ने 30 नवंबर को अपने कार्यकाल के आखिरी दिन यह निर्देश जारी किए। नए नियमों से नियोक्ताओं और कंपनियों को अकसर झेलने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। हालांकि, ट्रेड यूनियनों ने इस सर्कुलर पर नाखुशी जताई है। उन्होंने इसे वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाने का निर्णय किया है।
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दूसरी ओर, इस सर्कुलर में कर्मचारियों के हित में एक बात यह है कि इसमें भविष्य निधि कटौती के लिए ‘मूल वेतन’ का मतलब फिर से परिभाषित करने को कहा गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि कर्मचारियों को आमतौर पर अनिवार्य रूप से एक समान दिए जाने वाले ऐसे सभी भत्तों को मूल वेतन के रूप लिया जाए। हालांकि, सर्कुलर में साफ तौर उन भत्तों का जिक्र नहीं किया गया, जिन्हें मूल वेतन में शामिल किया जाना चाहिए। 
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सर्कुलर के अनुसार, नियोक्ताओं के खिलाफ जांच की शुरुआत तभी की जा सकती है, जब कार्रवाई योग्य और पड़ताल योग्य सूचनाएं अनुपालक या जांच अधिकारी के समक्ष पेश की जाए। इसके साथ ही अज्ञात कर्मचारियों के पीएफ खाते में बकाया रकम जमा करने में विफल रहने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ ईपीएफओ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।


जिस पीएफ खाताधारक के खाते में पैसे जमा कराने है, उसकी पहचान के बिना कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं को जांच अधिकारियों की सुविधा के लिए सभी सूचनाएं ऑनलाइन करनी होंगी।

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