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पेट्रोलियम उत्पादों के लिए सरल कर ढांचे पर जोर

Tue, 14 Oct 2014 08:55 AM IST
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया Updated Tue, 14 Oct 2014 08:55 AM IST
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 Petroleum Ministry seeks abolition of irrecoverable taxes by states on petroleum products
उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित तमाम राज्यों में अनुचित कर संरचना को रिफाइनरियों के विस्तार में बाधक बताते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्य सरकारों से पेट्रोलियम उत्पादों पर सभी वसूले न जा पा रहे करों को खत्म करने का अनुरोध किया है।
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पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा की अगुवाई में हुई बैठक में वसूले न जा पा रहे करों को हैंडल करने में आ रही बाधाओं को दूर करने पर फोकस किया गया। चंद्रा ने राज्यों के प्रतिनिधियों को बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों पर सभी वसूले न जा पा रहे करों को खत्म करने की जरूरत है। इससे रिफायनरियों की विस्तार योजना में बाधा आ रही है।
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पेट्रोलियम सचिव की राय थी कि वसूले न जा सकने वाले कर राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों द्वारा स्थानीय इलाके में कच्चे तेल के प्रवेश पर अथवा तेल कंपनी की बिक्री पर लगाए जाते हैं।
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राज्य सरकारें कर ढांचे को दूषित करतीं हैं और बाजार में तेल कंपनियों के लिए ऐसा माहौल तैयार करतीं हैं जिसमें सभी कंपनियों को कारोबार में समान अवसर नहीं मिलता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत काम करने वाला पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीसीए) का मानना है कि वसूले न जा पा रहे कर लगाए जाने से पीएसयू तेल कंपनियों और राज्यों में रिफाइनरी चलाने वाली कंपनियों के लिए दूसरी कंपनियों की तुलना में कारोबार का समान अवसर नहीं मिल पा रहा है।

स्थानीय बाजार में कीमतों में असमानता होने के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं हो पा रही है। कनार्टक, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। हालांकि बैठक में आम सहमति नहीं बन सकी और ठोस प्रस्ताव के साथ एक बार और मिलने का फैसला किया गया।

बैठक में हरियाणा ने कहा कि सरकारी तेल कंपनी आईओसी 2008 से राज्य सरकार कोई एंट्री टैक्स नहीं दे रही है। आईओसी की पानीपत में रिफायनरी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चंद्रा ने इस मामले में आईओसी को मामले की ताजा स्थिति पर एक रिपोर्ट मंत्रालय में जमा कराने को कहा है।


उत्तर प्रदेश ने सूचित किया है कि वह आईओसी के साथ कच्चे तेल पर एंट्री टैक्स खत्म करने के मुद्दे पर विचार विमर्श कर चुका है और राज्य सरकार का ऐसा मानना है कि राज्य में उपभोग होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट बढ़ा कर कच्चे तेल पर लगने वाले एंट्री टैक्स से मिलने वाले राजस्व की भरपाई करना संभव नहीं होगा।

हालांकि उत्तर प्रदेश की ओर से कहा गया है कि वह मामले का अध्ययन सकारात्मक रूप से करके आसान कर ढांचे का प्रस्ताव पेश करेगा।
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