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ओएनजीसी और ओवीएल के तीन बड़े अधिग्रहणों की जांच के आदेश

Thu, 21 Aug 2014 09:14 PM IST
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली Updated Thu, 21 Aug 2014 09:14 PM IST
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Petroleum Ministry orders investigations into three major acquisitions by ONGC and its overseas arm OVL

पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) द्वारा किए गए तीन बड़े अधिग्रहण सौदों की जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इन सौदे में हिस्सेदारी खरीदने और आवश्यक निवेश करने से पूर्व पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं की गई।

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पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी की ऑडिट एवं एथिक्स कमेटी से कहा है कि वह इन परियोजनाओं के विफल होने की गहराई से जांच करे। हालांकि, समिति के लिए भी इसकी वजह पता लगा पाना आसान नहीं है। ओएनजीसी की विदेश इकाई ओवीएल (ओएनजीसी विदेश लिमिटेड) द्वारा रूस में इंपीरियल एनर्जी का अधिग्रहण पिछले कुछ वर्षों से बहस का मुद्दा बना हुआ है। क्योंकि, ऐसा माना जा रहा है कि यह अधिग्रहण बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के किया गया, जिसके चलते ओएनजीसी भारी नुकसान उठा रही है। इस प्रोजेक्ट से जिस गुणवत्ता के तेल एवं गैस निकलने का अनुमान लगाया गया था, वास्तव में कंपनी को वैसा नहीं हासिल हुआ है।
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पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इन निवेशों को गंभीरता से लिया गया है और अब ओएनजीसी और ओवीएल के पूर्व प्रमुखों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है और अधिग्रहण सौदों पर इनकी भूमिका की जांच होगी।
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जांच के दायरे में आने वाली परियोजनाओं के बारे में सूत्रों ने बताया कि ओएनजीसी की ऑडिट एवं इथिक्स कमेटी ने प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) को दाहेज स्थित ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) के मेगा पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट के समय और लागत में हुई वृद्धि की वजहों की गहराई से जांच करने के लिए नियुक्त किया था। जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट का दावा है कि सरकारी क्षेत्र की उत्खनन एवं उत्पादन कंपनी ने इस प्रोजेक्ट में निवेश से पहले उसका उचित व्यावहारिक विश्लेषण नहीं किया। पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में ओपीएएल प्रोजेक्ट की प्रगति पर चिंता जताई है, जिसमें उत्पाद की निकासी और उसके वित्तीय करारों के लिए कंपनी की मार्केटिंग योजना में खामियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में प्रोजेक्ट के पूरा होने में हुई बेतहाशा देरी पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति की रिपोर्ट का अध्ययन ओएनजीसी कर रही है और वह मंत्रालय के साथ जल्द ही इसे अंतिम रूप दे देगी।

इसी तरह, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड द्वारा चार साल पहले 2.1 अरब डॉलर में किए गए इंपीरियल एनर्जी का अधिग्रहण भी जांच के दायरे में है। परियोजना के अधिग्रहण के समय ऑयल ब्लॉक से करीब 80,000 बैरल प्रति दिन के उत्पादन का अनुमान जताया गया था। हालांकि, इंपीरियल एनर्जी के ब्लॉक का उत्पादन घटकर 9,000 बैरल प्रति दिन रह गया। यह भारत की सबसे बड़ी उत्खनन कंपनी के लिए नुकसान उठाने वाला निवेश साबित हुआ। समिति ने अब ओएनजीसी से अधिग्रहण संबंधी दस्तावेज मंगाए हैं और इस प्रोजेक्ट की खरीदारी के बाबत निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच कर रही है, जिसके दायरे में ओवीएल के पूर्व प्रमुख भी आ सकते हैं।

ठीक इसी समय, बीजी के तीन नेल्प ब्लॉक में हिस्सेदारी का अधिग्रहण भी जांच के दायरे में है। ब्रिटिश गैस एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्टशन इंडिया लिमिटेड (बीजीईपीआईएल) ने ब्लॉक एमएन-डीडब्ल्यूएन-2002/2 में अपनी 25 फीसदी हिस्सेदारी ओएनजीसी को एक पैकेज डील के तहत हस्तांतरित की थी।


इस सौदे के तहत ओएनजीसी बीजी को तीन ब्लॉकों एमएन-डीडब्ल्यूएन-2002/2, केजी-ओएसएन-2004/1 और केजी-डीडब्ल्यूएन-98/4 से निकलने की अनुमति देगा। इसके लिए ब्रिटिश एनर्जी अपनी साझीदार ओएनजीसी को 5 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगी। यह भुगतान तीनों ब्लॉकों से उपार्जित सभी वित्तीय देनदारियों के पूर्ण व अंतिम निपटान के रूप में किया जाएगा। इस सौदे को, जिसके 1 दिसंबर 2011 से प्रभावी होने की उम्मीद थी, पेट्रोलियम मंत्रालय ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। अब ऑडिट एवं इथिक्स कमेटी इस सौदे से जुड़े मुद्दों की जांच करेगी।

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