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फिर गिर सकते हैं पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम

Sat, 08 Aug 2015 09:13 AM IST
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Aug 2015 09:13 AM IST
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Petrol, diesel and LPG prices may fall again

इंडियन बास्केट के कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर से 50 डालर के नीचे पहुंच गई है। यह पिछले आठ महीने के न्यूनतम स्तर है। इसके साथ ही एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में कटौती के आसार बन गए हैं।

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इससे अर्थव्यवस्था को तो फायदा पहुंचेगा ही, सरकार के सब्सिडी बिल में भी करीब 1,000 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 6 अगस्त को इंडियन बास्केट कच्चे तेल की कीमत 49.11 डॉलर प्रति बैरल थी।
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यदि इसे भारतीय मुद्रा के हिसाब से भी देखा जाए, तो उस दिन रुपया-डॉलर की विनिमय दर 63.76 रुपये थी, मतलब एक बैरल कच्चे तेल की कीमत 3,131.25 रुपये रही। इससे पहले जनवरी 2015 में इसकी कीमत 50 डॉलर से नीचे आई थी।
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ज्यादा बचत!

Petrol, diesel and LPG prices may fall again

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल आंकी गई है। इस वर्ष के शुरुआती चार महीनों में इसकी औसत कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल रही थी।

इससे आयात बिल में करीब 65,000 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। अब तो कीमत घट कर 50 डॉलर से नीचे पहुंच गई है। मतलब और ज्यादा बचत।

पेट्रोलियम सब्सिडी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के दौरान इस मद में 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

तेल की कीमत घटने का मिलेगा लाभ

Petrol, diesel and LPG prices may fall again

इस समय कच्चे तेल की कीमत चल रही है, उससे लगता है कि इसमें भी सरकार को करीब 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होगी।

अभी यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में यदि एक डॉलर की कमी आती है, तो भारत का आयात बिल 6,500 करोड़ रुपये तक घट जाता है।

हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये के घटते मूल्य से इस पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन तब भी तेल की कीमत घटने का तो लाभ मिलेगा ही।

कम वर्किंग कैपिटल की होगी जरुरत

Petrol, diesel and LPG prices may fall again

कीमत में कटौती से सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के कीमतों में कटौती की सौगात मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का फायदा तेल विपणन करने वाली सरकारी कंपनियों को प्रत्यक्ष रूप से मिलेगा। इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को अब कच्चे तेल के आयात के लिए कम वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी।

आमतौर पर यह कंपनियां बाजार से उधार जुटाकर कच्चे तेल का आयात करती हैं और जब तैयार उत्पाद बिक जाता है तो उधार चुका दिया जाता है।

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