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फिर बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 31 Jul 2013 10:10 PM IST
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मंडी में छाई महंगाई अभी कम नहीं हुई है कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाकर आम आदमी की जेब पर फिर से डाका डाल दिया।
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जनता की जेब काटने का सिलसिला इस कदर जारी है कि पिछले तीन माह में 8 रुपये 19 पैसा प्रति लीटर तक पेट्रोल के दाम बढ़ाए जा चुके हैं।
इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए तेल कंपनियों ने बुधवार को पेट्रोल 70 पैसा और डीजल 50 पैसा प्रति लीटर महंगा कर दिया।
अब दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल के लिए 71.28 रुपये और डीजल के लिए 51.40 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे। यह बढ़ोतरी बुधवार आधी रात से लागू हो गई।
हैरानी की बात यह है कि आम जनता की जेब में लगातार सेंधमारी होने के बावजूद सरकार ने चुप्पी साध रखी है।
पेट्रोलियम मंत्रालय पेट्रोल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने का हवाला देकर कीमतों में हस्तक्षेप से इंकार कर रहा है। लेकिन जानकारों का कहना है कि सरकार की शह पर ही तेल कंपनियां लगातार पेट्रोल मूल्य वृद्धि कर रही हैं।
अगर पेट्रोल मूल्य पर परोक्ष रुप से सरकार दबदबा नहीं होता तो संसद सत्र चलने के दौरान कीमतों में इजाफा क्यों नहीं किया जाता है।
उधर, तेल कंपनियों ने पुराना राग अलापते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल और कमजोर रुपये का हवाला देकर कीमतों में इजाफा किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनियों ने साफ कर दिया है कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो भविष्य में भी दाम बढ़ाने से परहेज नहीं किया जाएगा।
उनका कहना है कि पिछले पखवाड़े में पेट्रोल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 117.19 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120.05 डॉलर हो गई जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत भी 59.49 रुपये प्रति डॉलर से बढ़कर 60.03 रुपये प्रति डॉलर जा पहुंची है। इन सबका असर आम आदमी की जेब पर हुआ है।
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कमोबेश डीजल के दाम बढ़ाने के पीछे भी कंपनियों का यही तर्क है। हालांकि इस बढ़ोतरी के बावजूद डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों को 9.29 पैसा प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
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तेल कंपनियों का कहना है कि केरोसिन बिक्री पर उनका नुकसान 33.54 पैसा प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी पर 412 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा है।