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छोटे कारोबारियों का भुगतान बैलेंस शीट में दिखाना जरूरी

Fri, 29 Mar 2013 08:51 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव Updated Fri, 29 Mar 2013 08:51 PM IST
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payment of small businesses must be shown in balance sheet

छोटे कारोबारियों को भुगतान में होने वाली देरी की परेशानी से थोड़ी राहत मिल सकती है।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ऑडिटर्स को कंपनियों की बैलेंस शीट में इस बात का उल्लेख करना होगा कि कंपनी ने छोटे कारोबारियों को भुगतान कितने दिनों में किया है।

साथ ही मंत्रालय ने कारोबारियों के लिए भी एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि वह अपने बिल पर छोटे कारोबारी होने के लिए मिले पंजीकरण नंबर का उल्लेख जरूर करें, जिससे कि नियमों के अनुसार भुगतान न होने पर कंपनियों के लिए खिलाफ कदम उठाने में मदद मिल सके।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मौजूदा कानून के तहत छोटे कारोबारियों का भुगतान कंपनियों को 45 दिन के अंदर करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कंपनियां ऐसा नहीं कर रही हैं। इसे देखते हुए मंत्रालय ने ऑडिटर्स के लिए निर्देश और छोटे कारोबारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
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हरियाणा चैम्बर ऑफ कामर्स के पदाधिकारी एएल अग्रवाल के अनुसार मंत्रालय के तरफ से मिले सर्कुलर के अनुसार ऑडिटर्स को बैलेंस शीट में 3 सीडी के तहत यह उल्लेख करना होगा कि कंपनी ने छोटे कारोबारी को भुगतान कितने दिन में दिया है। यदि वह 45 दिन से ज्यादा समय में दिया गया है, तो उस पर कंपनी ने देरी की वजह से कितना ब्याज चुकाया है। इसका भी उल्लेख करना जरूरी होगा।

अग्रवाल के अनुसार इसके अलावा छोटे कारोबारियों के लिए जारी एडवाइजरी में यह कहा गया है कि वह जिला औद्योगिक केंद्र से मिले पंजीकरण नंबर का अपने बिल आदि में जरूर उल्लेख करें। इस पंजीकरण नंबर का विवरण होने से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कारोबारी माइक्रो एंड स्मॉल वर्ग के तहत आता है कि नहीं।


उनके अनुसार इस कदम से कारोबारियों को भुगतान मिलने में आसानी हो सकेगी। मंत्रालय के इस कदम पर फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज के महासचिव अनिल भारद्वाज के अनुसार इन कदमों का फायदा तभी होने वाला है, जब बैलेंस शीट में उल्लेख न करने वाले ऑडिटर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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