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पवार ने की एफडीआई की जोरदार वकालत

Tue, 09 Oct 2012 09:49 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 09 Oct 2012 09:49 PM IST
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pawar support fdi in retail decision
सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए कृषि मंत्री शरद पवार ने एक बार फिर मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की जोरदार वकालत करते हुए इसे किसानों के हित में उठाया गया कदम करार दिया।
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मंगलवार को आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में पवार ने कहा कि एफडीआई से किसानों को उपज की प्रतिस्पर्धी कीमतें मिलेंगी साथ ही अनाज की बर्बादी कम होने का भी उन्हें फायदा मिलेगा। साथ ही उपभोक्ताओं को भी अनेक विकल्प व कम कीमत का लाभ मिल सकेगा। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास दर चार फीसदी रहने की उम्मीद व्यक्त करते हुए बताया कि खरीफ सीजन के दौरान मानसून की तुनकमिजाजी के चलते अनाज उत्पादन में हुई कमी की भरपाई रबी से करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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मल्टी ब्रांड रीटेल में एफडीआई को खेती-किसानी के लिए लाभप्रद बताते हुए पवार ने उम्मीद व्यक्त की कि इससे किसानों को उपज की बेहतर कीमतें प्राप्त हो सकेंगी। साथ ही ढांचागत सुविधाएं बढ़ने से फसल बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी। जिसका लाभ भी किसानों को मिल सकेगा।
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वहीं उपभोक्ताओं को भी बेहतर चुनने का विकल्प और कम कीमत देना पड़ेगा। एफडीआई से पूरे मूल्य और आपूर्ति श्रृंखला में सभी अंशधारकों को लाभ प्राप्त होगा। निवेश के कारण कृषि क्षेत्र को विकसित करने में मदद मिलेगी। पवार ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास दर चार फीसदी रहने की उम्मीद व्यक्त की है।

कृषि मंत्री के मुताबिक मानसून कमजोर रहने से खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं। जिसके चलते खरीफ में अनाज उत्पादन दस फीसदी तक घट सकता है। हालांकि सरकार पूरी तरह से प्रयास कर रही है कि अनाज उत्पादन में अनुमानित गिरावट को रबी सीजन के उत्पादन से पूरा कर लिया जाए।


जाहिर है कमजोर बरसात और कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के 360  से भी अधिक तालुकों में सूखे की स्थिति के कारण कृषि मंत्रालय ने इस वर्ष के अनाज उत्पादन के पहले पूर्वानुमान में खरीफ का उत्पादन दस फीसदी घटाकर 11.72 करोड़ टन रहने की आशंका जाहिर की थी।
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