किसानों को बड़ा ‘तोहफा’ मिलने की उम्मीद नहीं
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तंग आर्थिक हालातों के बीच कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि वह आगामी बजट से सस्ते फसल लोन जैसी बड़ी घोषणाओं की उम्मीद नहीं करते हैं। 2013-14 के लिए वित्त मंत्री एक ‘सख्त बजट’ पेश कर सकते हैं। पवार ने एक साक्षात्कार में कहा कि आगामी बजट एक सख्त बजट हो सकता है। इसको लेकर कुछ चिंताएं जरूर हैं। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम फरवरी अंत में आम चुनाव से पहले यूपीए सरकार का आखिरी पूरा बजट पेश करेंगे।
पवार ने कहा कि आगामी बजट से उन्हें समय पर फसल कर्ज चुकाने वाले किसानों को ब्याज दरों में और कमी किए जाने की उम्मीद नहीं है। वर्तमान में समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 4 फीसदी ब्याज पर कृषि लोन मिलता है। हालांकि, पवार ने इच्छा जताई कि आगामी बजट में वित्त मंत्री को सिंचाई के मद में अधिक फंड उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का आधा कृषि क्षेत्र सिंचाई की सुविधा से महरूम है। वित्त मंत्री को इसका ध्यान बजट में रखना चाहिए। मैं चाहता हूं कि वित्त मंत्री को सिंचाई परियोजनाओं के लिए अधिकतम धनराशि उपलब्ध करानी चाहिए।
पवार ने उम्मीद जताई कि बजट में पानी का संरक्षण करने वाली ड्रिप सिंचाई जैसी योजनाएं संचालित करने वाले विभिन्न मंत्रालयों को ऐसी योजनाओं के लिए अधिक से अधिक वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि पानी का अपव्यय अधिक होता है। हमें पानी का व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करना होगा। दाल और तिलहन के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार के नए कदमों को लेकर पूछे सवाल के जवाब में पवार ने कहा कि हम बजट तैयारी की प्रक्रिया में हैं। अधिकांश बातें वित्त मंत्री के बजटीय भाषण का हिस्सा होंगी। मैं नई योजनाओं के बारे में बताने की स्थिति में नहीं हूं।
पवार ने कहा कि पूर्व में घोषित की गई राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाने जैसी योजनाओं का परिणाम बेहतर दिखाई देगा। इनमें चावल, गेहूं, दाल और बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। गेहूं जैसी जाड़े की फसलों के बारे में कृषि मंत्री ने कहा कि अभी तक फसल का अनुमान अच्छा है। फसल का रकबा अधिक है और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में उत्पादन पिछले साल के मुकाबले अधिक रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विपणन वर्ष 2013-14 के लिए घोषित गेहूं के समर्थन मूल्य 1,350 रुपये पर कुछ राज्यों द्वारा बोनस मूल्य दिए जाने की घोषणा से किसानों का गेहूं की तरफ आकर्षण बढ़ा है।