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कंपनी बिल मंजूर, अब धोखाधड़ी पर शिकंजा कसना आसान

Fri, 09 Aug 2013 12:11 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 09 Aug 2013 12:11 AM IST
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parliament passes companies bill

देश में कंपनी कानून के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। बृहस्पतिवार को 57 साल पुराने कंपनी कानून की जगह अब नया कंपनी बिल लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

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बीते दिसंबर में लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब राज्यसभा ने भी इसकी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के मुहर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।

नए बिल के जरिए जहां कंपनियों की निवेशकों और उनके कर्मचारियों के प्रति पहले से ज्यादा जवाबदेही बढ़ेगी।

वहीं, ऐसी कंपनियों की धोखाधड़ी पर भी लगाम लग सकेगी, जो निवेशकों के हितों की अनदेखी करती हैं। साथ ही अब कंपनियों को अपनी कमाई का एक हिस्सा सामाजिक दायित्व के लिए खर्च करना भी अनिवार्य होगा।
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राज्य सभा में बिल पर चर्चा के दौरान कंपनी मामलों के मंत्री सचिन पायलट ने कहा कि नया कानून कंपनियों को जहां पहले से अधिक जवाबदेह बनाएगा, वहीं उनके गवर्नेंस को भी मजबूती देगा।
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कंपनी बिल का पारित होना भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण है। नए कंपनी कानून के जरिए ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश है, जिससे धोखाधड़ी की घटनाएं होने से पहले ही उन पर लगाम लगाई जा सके।

इसी के मद्देनजर हमने स्थायी समिति की 96 फीसदी सुझावों को बिल में जगह दिया है। समिति ने कुल 193 सुझाव दिए थे।

पायलट के अनुसार नए कानून में कंपनियों को कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत दो फीसदी राशि खर्च करनी है, जिसे किसी भी तरह से कर या अधिभार नहीं समझना चाहिए। हम कोई इंसपेक्टर राज नहीं लागू करना चाहते हैं। साथ ही नए कानून बनाते वक्त सभी सुझावों को अहमियत दी जाएगी।

कंपनी बिल को सबसे पहले साल 2009 में लोकसभा में पेश किया गया था। इसे पेश करने के एक महीने बाद वित्तीय मामलों की स्थायी समिति को भेज दिया गया था।

साल 2011 में दोबारा पेश किया गया, जिसे फिर स्थायी समिति के पास भेज दिया गया। इसके बाद पिछले साल लोकसभा ने कंपनी बिल 2012 के तहत इसे मंजूरी दे दी थी।

नया कानून कंपनियों को जहां पहले से अधिक जवाबदेह बनाएगा, वहीं उनके गवर्नेंस को भी मजबूती देगा। कंपनी बिल का पारित होना भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण है।-सचिन पायलट, कंपनी मामलों के मंत्री

कंपनी बिल को सरकार की ओर से प्राथमिकता दिए जाने की हम सराहना करते हैं। यह कॉरपोरेट नियमन को नए दौर में ले जाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमें खुशी है कि सीआईआई के अधिकांश सुझावों को विधेयक में शामिल किया गया है। अब जबकि कानून तैयार है, यह समय इसके प्रावधानों के अनुपालन के व्यावहारिक पहलुओं पर कार्य करने और ध्यान केंद्रित करने का है।-चंद्रजीत बनर्जी, महानिदेशक, सीआईआई

कंपनी कानून के इतिहास में यह विधेयक मील का पत्थर है। आने वाले समय में यह कारोबार के प्रबंधन और प्रशासन में आमूलचूल बदलाव लाएगा। नए बिल से कई तरह के बदलाव सामने आएंगे, जिनसे नियमन आसान होगा और कारोबार के प्रबंधन में अधिक स्पष्टता और पारदर्शिता आएगी।-नैना लाल किदवई, प्रेसिडेंट, फिक्की


प्रमुख बातें:-
- कंपनी के निदेशक मंडल में कम से कम एक तिहाई सदस्य स्वतंत्र निदेशक होंगे।
- निदेशक मंडल में कम से कम एक महिला निदेशक होना जरूरी।
- कोई भी पार्टनर या व्यक्ति 20 से ज्यादा कंपनियों में निदेशक नहीं नियुक्त हो सकेगा।
- स्वतंत्र निदेशकों को छह साल में बदलना अनिवार्य होगा।
- एसोसिएटेड कंपनी, स्मॉल कंपनी, सीईओ, सीएफओ, प्रमोटर सहित 33 विषयों की नई परिभाषा कंपनी बिल में शामिल की गई है।

कंपनी विधेयक कुछ तथ्य:
कंपनी विधेयक 2011 को लोकसभा ने 18 दिसंबर 2012 को ही पारित कर दिया था। नए कंपनी विधेयक में कॉरपोरेट फ्राड रोकने के उपायों के साथ-साथ कंपनियों और ऑडिट करने वाली फर्मों के नियमों को मजबूत करने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद कॉरपोरेट्स की जवाबदेही बढ़ जाएगी और पारदर्शिता भी। कॉरपोरेट धोखाधड़ी की स्थिति में छोटे निवेशकों के हित पहले के मुकाबले अधिक सुरक्षित रह सकेंगे।

यह मुख्य बदलाव होंगे:-
- नया कंपनी बिल 57 साल पुराने कंपनी बिल 1956 की जगह लेगा।
- एक व्यक्ति के लिए भी कंपनी स्थापित करना हो जाएगा मुमकिन।
- सीएसआर के तहत बड़ी कंपनियों को मुनाफे का 2 फीसदी खर्च करना अनिवार्य।
- कंपनियों को अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले औसत वेतन की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
- कॉरपोरेट फ्राड रोकने के लिए एफएसआईओ को संवैधानिक दर्जे का प्रावधान, गिरफ्तारी सहित अन्य शक्तियां मिलेंगी।
- कंपनियां किसी एक ऑडिटर की सेवा केवल पांच साल तक के लिए ही ले सकेंगी।
- ऑडिटर यदि अपूर्ण या गलत ऑडिट रिपोर्ट पर दस्तखत करेंगे, तो उन पर आपराधिक मामला चलेगा।
- तालाबंदी की स्थिति में कंपनियों को दो साल के वेतन का भुगतान कर्मचारियों को करना होगा।
- शेयरहोल्डर को अदालत में क्लास एक्शन मुकदमा दायर करने का मिलेगा अधिकार।
- इनसाइडर ट्रेडिंग जैसी कार्रवाई को अपराध की श्रेणी में लाया गया है।
- सेबी को कंपनी पर कार्रवाई का अधिकार होगा।
- सभी कंपनियों के लिए अप्रैल से मार्च का होगा वित्तीय वर्ष।
- इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वोटिंग की व्यवस्था।
- कंपनी के शुद्ध लाभ के 5 फीसदी से अधिक नहीं होगा निदेशक का वेतन।

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