{"_id":"ae614b86-0d96-11e2-a185-d4ae52ba91ad","slug":"parekh-committee-suggests-do-expensive-electricity-railways-and-gas","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारेख समिति का सुझाव, महंगी करो बिजली, रेल और गैस","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
पारेख समिति का सुझाव, महंगी करो बिजली, रेल और गैस
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Oct 2012 01:42 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महंगाई की मार से बेहाल लोगों की परेशानियां आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं। एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख की अध्यक्षता में बनी एक समिति ने सरकार को बिजली की दरें, रेल का किराया और प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने का सुझाव दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के वित्त पोषण के उपाय सुझाने के लिए बनी इस समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंप दी है। रिपोर्ट में टेलीकॉम सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 74 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने का भी सिफारिश की है।
अपनी रिपोर्ट में दीपक पारेख समिति ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्यावरण मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए समिति ने जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल्स (गार) से जुड़े मसलों को हल करने पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 12वीं पंचवर्षीय योजना में इन्फ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर 51.46 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है, जिसमें से निजी क्षेत्र का योगदान करीब 47 फीसदी तक हो सकता है।
इन सिफारिशों पर अमल के बारे में समिति का कहना है अगर यथास्थिति कायम रहती है, न सिर्फ भविष्य में आने वाला निवेश प्रभावित होगा, बल्कि मौजूदा परियोजना की फंडिंग पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में आईआईएफसीएल की भूमिका में बदलाव पर जोर देते हुए समिति ने इसे गारंटर के बजाय कर्जदाता संस्था के तौर पर आगे आने का सुझाव दिया है। इसी प्रकार विद्युत वितरण में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और विद्युत उत्पादकों को सीधे कोयला आयात करने की अनुमति दिए जाने को जरूरी बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपनी रिपोर्ट में दीपक पारेख समिति ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्यावरण मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए समिति ने जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल्स (गार) से जुड़े मसलों को हल करने पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 12वीं पंचवर्षीय योजना में इन्फ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर 51.46 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है, जिसमें से निजी क्षेत्र का योगदान करीब 47 फीसदी तक हो सकता है।
विज्ञापन
इन सिफारिशों पर अमल के बारे में समिति का कहना है अगर यथास्थिति कायम रहती है, न सिर्फ भविष्य में आने वाला निवेश प्रभावित होगा, बल्कि मौजूदा परियोजना की फंडिंग पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में आईआईएफसीएल की भूमिका में बदलाव पर जोर देते हुए समिति ने इसे गारंटर के बजाय कर्जदाता संस्था के तौर पर आगे आने का सुझाव दिया है। इसी प्रकार विद्युत वितरण में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और विद्युत उत्पादकों को सीधे कोयला आयात करने की अनुमति दिए जाने को जरूरी बताया है।
विज्ञापन