फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   packaging industry going through bad time in noida

पैकेजिंग इंडस्ट्री खुद ‘पैक’ होने की कगार पर

Wed, 20 Feb 2013 11:52 AM IST
अनुराग त्रिपाठी/नोएडा
अनुराग त्रिपाठी/नोएडा Updated Wed, 20 Feb 2013 11:52 AM IST
विज्ञापन
packaging industry going through bad time in noida

सवा लाख लोगों के घरों का चूल्हा जलाने वाली पैकेजिंग इंडस्ट्री शहर में बुरे दौर से गुजर रही है। नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) की स्थापना के साथ ही शहर को गुलजार करने वाली यह इंडस्ट्री आज पलायन की मार झेल रही है। करों की असमानता और दूसरी समस्याओं से परेशान होकर पैकेजिंग इंडस्ट्री बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इस उद्योग से जुड़े उद्यमी आगामी बजट में वित्त मंत्री को ओर उम्मीदों की टकटकी लगाए हुए हैं।

विज्ञापन


एक समय था जब नोएडा में बड़ी-बड़ी कंपनियां उत्पादन कर रही थीं। माल तैयार होने के बाद इनके आकर्षक पैंकिंग का काम इसी इंडस्ट्री के पास था। शहर में छोटी-बड़ी करीब 600 पैकेजिंग इकाइयां काम कर रही थीं, लेकिन सरकारी उपेक्षा व उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने उद्यमियों को वाणिज्य कर से लेकर तमाम टैक्स में छूट देना शुरू कर दिया।
विज्ञापन


इसके बाद शहर से इन कंपनियों का पलायन शुरू हो गया। आज नौबत यहां तक आ गई कि इन इकाइयों की संख्या करीब आधी रह गई है। बची हुई इकाइयां भी रोजाना की समस्याओं से अपना धंधा समेटने की तैयारी में हैं। नोएडा में पैकेजिंग इंडस्ट्री का पलायन 2004-05 में शुरू हुआ और 2008 तक करीब 40 फीसदी कंपनियां दूसरे प्रांतों में शिफ्ट हो गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पैकेजिंग इंडस्ट्री की प्रमुख मांगें
:- राज्यों में एक समान टैक्स नीति लागू हो। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स हो लागू
:- लघु उद्योगों के लिए बैंक लोन प्रोसेसिंग फीस समाप्त किया जाए
:- बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए
:- सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने से उद्योगों को मदद मिलेगी
:- कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए औद्योगिक शहरों में इंडस्ट्री फोर्स की तैनाती हो
:- औद्योगिक नीति बनाते समय उद्यमियों की राय जरूर लिया जाए

समान टैक्स हो अनिवार्य
'पूरे देश में एक समान टैक्स होने से राज्यों में विवाद उत्पन्न नहीं होगा और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। हर इंडस्ट्री एक दूसरे पर निर्भर है। अगर बड़ी उत्पादन वाली कंपनियां अपना स्थान छोड़ेंगी तो पैकेजिंग इंडस्ट्री को भी हटना होगा।'
- आलोक गुप्ता, उद्यमी

बिजली ने तोड़ी कमर
'हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तमाम छूट के साथ बिजली व्यवस्था भी दुरुस्त है। नोएडा में तमाम टैक्स देने के बाद भी बिजली समस्या परेशान करती है। ऐसे में वित्त मंत्री  को उद्योगों के लिए बिजली की व्यवस्था के लिए कदम उठाने चाहिए।'
- एचके अरोड़ा, उद्यमी


बुनियादी ढांचे का विकास हो
'समान टैक्स के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत किया जाए। वित्त मंत्री को इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास जोर देना होगा। उद्यमियों को बुनियादी ढांचे के अभाव में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बिजली के साथ कानून-व्यवस्था, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और श्रमिकों की उपलब्धता भी समस्या है।'

- मोहन सिंह, उद्यमी

दिल्ली की मार से परेशान

'दिल्ली में कागज पर 4 प्रतिशत का वैट और एंट्री टैक्स शून्य है। इसके विपरीत नोएडा में वैट 5 प्रतिशत और एंट्री टैक्स दो फीसदी वसूल किया जाता है। ऐसे में पहले ही उद्यमी को कागज तीन प्रतिशत महंगा पड़ता है। नोएडा दिल्ली से सटा हुआ है, लेकिन दिल्ली की मार झेल रहा है।'
- सुशील सूद, उद्यमी

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed