{"_id":"25ef94afa8182330bb83748049dbfa36","slug":"ongc-under-fire-for-poor-performance-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के निशाने पर ओएनजीसी","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
सरकार के निशाने पर ओएनजीसी
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
Updated Sat, 20 Sep 2014 09:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश की नवरत्न कंपनियों में शुमार ओएनजीसी खराब प्रदर्शन और विदेश में किए गए निवेश को लेकर एनडीए सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के निशाने पर है।
विज्ञापन
इस बीच ओएनजीसी ने शुक्रवार को कहा है कि उसने नई खोजों से उत्पादन शुरू करने और पुराने तेल क्षेत्र में प्राकृतिक गिरावट को थामने के लिए 81,890 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
विज्ञापन
एनडीए सरकार ने सत्ता संभालने के बाद ओएनजीसी के निवेश और उसकी कार्यशैली को लेकर चिंता जताई है। वास्तव में माना जा रहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी द्वारा किए गए निवेश, खासतौर पर पिछले कुछ वर्षों के दौरान विदेश में किए गए निवेश और घरेलू स्रोतों के जरिए तेल और गैस जरूरतों को पूरा करने में उम्मीदों पर खरा न उतरने के पहलू को देखने के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया है।
विज्ञापन
कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान मुश्किल से ऐसी कोई खोज की है, जिसे उल्लेखनीय कहा जा सके। वहीं कंपनी की ओर से नई तेल और गैस संपत्तियां खोजने के दावे किए गए हैं। नीलामी के नेल्प दौर के तहत ओएनजीसी के पास सबसे बड़े तेल और गैस ब्लॉक हैं लेकिन नतीजे शून्य रहे हैं।
ओएनजीसी के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश के. सर्राफ ने शेयरधारकों को कंपनी की सालाना आम बैठक में बताया कि हमारे प्रमुख तेल एवं गैस उत्पादक फील्ड पुराने हैं और प्राकृतिक गिरावट दिखा रहे हैं। ओएनजीसी ने इस ट्रेंड पर अंकुश लगाने और इन फील्ड्स से उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं।
ओएनजीसी ने इन फील्डों पर अपनी इंप्रूव्ड ऑयल रिकवरी (आईओआर) एंड एनहैंस्ड ऑयल रिकवरी (इओआर) स्कीमों में बेहतरीन टेकभनोलॉजीज तैनात की गई हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रयासों का नतीजा अच्छा रहा है और अकेले वित्त वर्ष 2014 में उत्पादन 7.46 मिलियन टन बढ़ा है। यह ओएनजीसी के घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन का 33 फीसदी है।
इस तरह से वित्त वर्ष 2014 तक कच्चे तेल का उत्पादन 87.41 मिलियन टन बढ़ा है। 24 परियोजनाओं में गिरावट रोकने और उत्पादन बढ़ाने के लिए 41,316 करोड़ पूंजी निवेश करने की योजना थी। इसमें से 19 परियोजनाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।
ओएनजीसी के तेल और गैस रिजर्व को तेजी से विकसित करने के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा कि विकसित करने के लिए 15 संभावित प्रोजेक्ट लिए गए। इसमें से 7 प्रोजेक्ट पहले ही पूरी हो चुके हैं और 8 प्रोजेक्ट में विभिन्न चरणों में काम चल रहा है।
इनमें से कुछ प्रोजेक्ट जैसे सी-24, बी-22 क्लस्टर, एसबी-14, बी-46, बीएचई और बीएच-35 नार्थ ताप्ती, सी सीरीज और डी-1 में पहले की उत्पादन शुरू हो चुका है। सर्राफ ने कहा कि 40,373.7 करोड़ रुपये की अनुमानित पूंजी निवेश के साथ ये प्रोेजेक्ट अतिरिक्त 45.66 मिलियन टन कच्चे तेल और 67.44 बिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने के लिए तैयार हो रहे हैं।
सर्राफ ने कहा कि ओएनजीसी पश्चिमी तट पर दमन गैस फील्ड और केजी-डीडब्लूएन-98 / 2 या केजी-डी 5 ब्लॉक में तेल और गैस खोजों के विकास पर फोकस कर रहा है। उन्होंने कहा कि दमन गैस फील्ड को विकसित करने के प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है।
इसे विकसित करने के लिए 5,219 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। दमन गैस फील्ड से 2016 तक उत्पादन शुरू किया जाना है। वहीं 2018 तक केजी-डीडब्लूएन-98 / 2 से उत्पादन शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।