इस नीलामी से मिलेंगे 61,000 करोड़
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पिछली दो नीलामी फ्लाप होने के बाद 2जी स्पेक्ट्रम की तीसरी नीलामी सरकार के लिए खुशियां लेकर आई है।
सरकार को तीसरे दौर की नीलामी से कुल 61,141 करोड़ रुपये मिलेंगे। जिसमें से चालू वित्त वर्ष में सरकार करीब 18 हजार करोड़ रुपये कंपनियों से अपफ्रंट फीस के रूप में प्राप्त कर सकेगी।
तीन फरवरी को शुरू हुई नीलामी 10 दिन तक 68 दौर की बोली के बाद बृहस्पतिवार को समाप्त हुई है।
बैंकों से कैसे मिलेगा कर्ज
नीलामी से इस साल मिलने वाले 18 हजार करोड़ रुपये सरकारी खजाने को बड़ी राहत देंगे। वहीं, ऊंची बोली लगने से कर्ज में डूबी टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए बैंकों से कर्ज लेना अब एक प्रमुख चुनौती होगी।
2जी स्पेक्ट्रम नीलामी को मिले रिस्पांस से उत्साहित टेलीकॉम मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है नीलामी बेहद कामयाब रही है। सरकार से इससे 61,141 करोड़ रुपये मिलेंगे। जिसका फायदा ग्राहकों को बेहतर सेवा और बेहतर टैरिफ रेट के रूप में मिल सकेगा।
कंपनियों ने सबसे ज्यादा ऊंची बोली 900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के तहत दिल्ली, मुंबई और कोलकाता सर्किल के लिए लगाई। दिल्ली के लिए बेस प्राइस से 106 फीसदी ज्यादा, मुंबई के लिए करीब 72 फीसदी और कोलकाता के लिए करीब 55 फीसदी ज्यादा बोली लगाई है। सरकार को 900 मेगाहर्ट्ज से कुल 23,589 करोड़ रुपये मिलेंगे।
20 साल के लिए लगी है बोली
वहीं, 1800 मेगाहर्ट्ज का स्पेक्ट्रम जो देश के सभी 22 टेलीकॉम सर्किल के लिए है, वहां पर कंपनियों ने सबसे ज्यादा असम के लिए बोली लगाई है। जहां बेस प्राइस की तुलना में 400 फीसदी ज्यादा बोली लगी है। 1800 मेगाहर्ट्ज से सरकार को 37,752 करोड़ रुपये मिलेंगे।
वोडाफोन इंडिया के एमडी और सीईओ मार्टेन पीटर्स का कहना है कि कंपनी ने नीलामी के जरिए देश के सभी प्रमुख सर्किल में अगले 20 साल के लिए लाइसेंस सुरक्षित कर लिया है।
1800 मेगाहर्ट्ज के जरिए 4जी के लिए भी कंपनी ने दरवाजे खोल दिए हैं। भारती एयरटेल के ज्वांइट एमडी और सीईओ गोपाल विट्टल के अनुसार नीलामी से लंबी अवधि की स्पष्टता और निश्चितता तय हुई है।
किश्तों में मिलेगा सरकार को पैसा
सरकार ने पिछली नीलामी के कीमत की तुलना में 900 मेगाहर्ट्ज के लिए कीमतों में 53 फीसदी कमी की थी, जबकि 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए बेस प्राइस 26 फीसदी कम कर 1,765 करोड़ रुपये रखा था।
नियमों के तहत कंपनियों को अपफ्रंट फीस के रूप में 900 मेगाहर्ट्ज की कुल बोली की 25 फीसदी और 1800 मेगाहर्ट्ज की 33 फीसदी राशि चुकानी होगी। बाकी राशि किस्त पर चुकानी होगी। कंपनियों को नए लाइसेंस 20 साल के लिए मिलेंगे।