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करोड़ो रुपए का कर्ज न चुकाने वाले 232 लोग
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 23 Oct 2013 12:28 PM IST
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डूबते कर्ज से परेशान बैंक अब जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों पर सख्ती बढ़ाने के उपाय अपना रहे हैं।
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बैंक इसके तहत अब ऐसी कंपनियों की सूची सार्वजनिक कर रहे हैं, जो कि जानबूझ कर कर्ज नहीं चुका रही हैं। जिससे कि इन कंपनियों पर कर अदायगी का दबाव बनाया जा सके और इनके प्रमोटर्स को शर्मिंदगी उठानी पड़े।
साथ ही बैंक को उम्मीद है कि उसके इस कदम से अन्य कंपनियों पर भी लोन चुकाने का दबाव बनेगा। इस कड़ी में पंजाब नेशनल बैंक के बाद ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) भी शामिल हो गया है।
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ओबीसी ने अपनी वेबसाइट पर 25 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज लेकर जानबूझ कर न चुकाने वाले 232 ग्राहकों की सूची सार्वजनिक की है। इस सूची में जून 2013 तक लोन न भरने वाले 60 ऐसे डिफॉल्टर शामिल हैं, जिन्होंने जानबूझ कर कर्ज नहीं चुकाया है। हालांकि बैंक ने अभी तक इन पर मामला दर्ज नहीं किया है। दूसरी ओर 172 डिफॉल्टर ऐसे हैं, जिनके खिलाफ बैंक ने मामला भी दर्ज करा दिया है।
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सूची में नोएडा स्थित सेंचुरी कम्युनिकेशंस पर 96.21 करोड़ रुपए, पिक्सियॉन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड पर 95 करोड़ रुपए, पर्ल स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड पर 111.65 करोड़ रुपए ,जालंधर के अमनजोत इंजीनियर्स पर 40 लाख रुपए, अंबे पाइप फिटिंग वर्क्स पर 41 लाख रुपए, कैपिटल इंटरप्राइजेज पर 48 लाख रुपए, उत्तर प्रदेश के खतौली स्थित अमित ट्रेडिंग कंपनी पर 2.30 करोड़ रुपए, मुजफ्फरनगर के राणा हैवी इंजीनियरिंग पर 30.02 करोड़ रुपए, हरिद्वार के लैपटॉप जोन पर 77 लाख रुपए, मंत्राइंफो सिस्टम पर 69 लाख रुपए का कर्ज बकाया है। इसके अलावा सूची में 60 अन्य डिफॉल्टर भी शामिल हैं।
ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वालों की सूची में ऐसी कंपनियां और उनके प्रोमोटर्स होते हैं, जो कि कर्ज चुकाने की क्षमता रखने के बावजूद कर्ज नहीं चुकाते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने ऐसे सभी डिफॉल्टर्स को नोटिस भी भेज दिया है कि वह उनके नाम वेबसाइट पर सार्वजनिक करने जा रहे हैं। इसमें से अभी हमने कुछ के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है।
ऐसे में अगर वह कर्ज चुका देते हैं, तो उनके खिलाफ मामला दर्ज होने से बच सकता है। इसके पहले वित्त मंत्रालय और आरबीआई गवर्नर बैंकों को निर्देश दे चुके हैं कि वह जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करें। यदि जरूरत पड़े, तो उन कंपनियों के प्रोमोटर्स में बदलाव करने की भी शर्त रखें। इसके बाद बैंकों ने डिफॉल्टरों की सूची सार्वजनिक करने की कार्रवाई की शुरूआत कर दी है।