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यूपी में अटके पड़े हैं एनटीपीसी के 35 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट

Mon, 24 Nov 2014 09:18 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Mon, 24 Nov 2014 09:18 AM IST
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NTPC projects of 35 thousand crore in UP deferred

उत्तर प्रदेश से बिजली संकट दूर करने के लिए एनटीपीसी ने 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, जिससे कि पूरे राज्य में 3200 मेगावाट की क्षमता वाली विभिन्न परियोजनाओं को पूरा किया जा सके। लेकिन, उसकी यह योजना निवेश और पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिलने में हो रही देरी और राज्य सरकार द्वारा जमीन का अधिग्रहण पूरा नहीं करने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है।

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वर्तमान में एनटीपीसी की राज्य में 26 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 9,814.14 मेगावाट की क्षमता वाली परियोजनाएं चल रही है। कंपनी ने कई अन्य परियोजनाओं की योजना बनाई है, जिसमें से कई निर्माणाधीन हैं। लेकिन, इनके लिए राज्य सरकार जमीन का अधिग्रहण कराने में लगातार देरी कर रही है। इससे स्पष्ट है कि राज्य की अखिलेश यादव सरकार के इस लचर रुख के कारण भावी निवेशकों को गलत संदेश जाएगा।
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राज्य में 3163 मेगावाट की पांच निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए 22,488 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी मिली है। इनमें से 1320 मेगावाट की मेजा-1 और 1320 मेगावाट की टांडा परियोजना पर सबसे अधिक निवेश होगा। इन दोनों परियोजनाओं को 2017-18 और 2018-19 तक पूरा किया जाना है, जबकि 1820 मेगावाट की अन्य परियोजनाएं अभी शुरुआती दौर में हैं।
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इसके अलावा एनटीपीसी ने दो अन्य बड़ी परियोजनाओं की योजना बनाई है। इनमें से एक 1320 मेगावाट की बिलहौर परियोजना है, जबकि दूसरी 500 मेगावाट की सिंगरौली-3 परियोजना है। इन परियोजनाओं में 12,425 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

दुर्भाग्यवश बिलहौर परियोजना के लिए कानपुर नगर में जमीन अधिग्रहण में एनटीपीसी को दिक्कतें पेश आ रही हैं। साथ ही नई भूमि अधिग्रहण नीति के अनुसार मुआवजे के लिए दिशानिर्देश जारी नहीं होने के कारण एनटीपीसी को अधिग्रहित 1238 एकड़ जमीन में से 1193 एकड़ पर कब्जा हासिल करना है। उसे परियोजना के लिए निवेश को मंजूरी का भी इंतजार है। परियोजना पर 9001.98 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक किसी सहयोग को मंजूरी नहीं दी है।


सिंगरौली की परियोजना को लेकर भी दिक्कतें आ रही हैं। कंपनी ने नवंबर 2008 में परियोजना के लिए कोल लिंकेज का आवेदन किया था, लेकिन कोयला मंत्रालय ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। परियोजना पर अनुमानित 3423.47 करोड़ रुपये की लागत को भी अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।

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