क्या खत्म होगा सस्ते कर्ज का इंतजार?
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भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। रिजर्व बैंक के अनुसार मौद्रिक नीति तय करने में खुदरा महंगाई दर को जोड़ कर देखने की जरूरत है।
ऐसे में जब महंगाई दर दो अंकों या उसके करीब हिचकोले खा रही है, रिजर्व बैंक की नई पहल महंगे कर्ज की आशंका को और बढ़ा रही है। इससे महंगे कर्ज का दौर और लंबा खिंच सकता है।
इस मामले में देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रिजर्व बैंक की सोच लंबी अवधि के लिए सही है, पर मौजूदा परिस्थितियों में यह कदम उठाना आसान नहीं होगा। उनके अनुसार महंगाई को कम करना अकेले आरबीआई के बस में नहीं है।
मौजूदा ऊंची महंगाई दर सरकार की वजह से है। ऐसे में आरबीआई के साथ-साथ सरकार को मिलकर चार से छह फीसदी के बीच महंगाई दर लाने के कदम उठाने होंगे। यदि खुदरा महंगाई दर से मौद्रिक नीति तय होती है, तो कर्ज की ब्याज दरें और बढ़ जाएंगी।
कैसे मिलेगा सस्ता कर्ज?
गौरतलब है कि आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ऊर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सीपीआई यानी रिटेल महंगाई दर को 2 साल के अंदर 6 फीसदी तक लाने का कठिन लक्ष्य दिया है।
ऊर्जित पटेल कमिटी चाहती है कि पॉलिसी तैयार करते वक्त थोक महंगाई के बजाय रिटेल महंगाई दर को ध्यान में रखा जाए। साथ ही ऊर्जित पटेल रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि सरकार को वित्त वर्ष 2017 तक वित्तीय घाटा काबू करके 3 फीसदी तक लाना ही होगा।
क्यों नहीं मिल रहा है सस्ता कर्ज?
सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ऊर्जित पटेल कमेटी की सिफारिशों से खुश नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक भारतीय मौद्रिक नीति की तुलना अमेरिका की पॉलिसी से करना सही नहीं है।
महंगाई दर के आधार पर पॉलिसी बनाने की समीक्षा करने की जरूरत है, लेकिन यह करीब-करीब तय है कि देर से ही सही सरकार को इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करना ही होगा क्योंकि तेज रफ्तार महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार के पास और कोई हथियार नहीं है।
ऊर्जित पटेल रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि सरकार को वित्त वर्ष 2017 तक वित्तीय घाटा काबू करके 3 फीसदी तक लाना होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पॉलिसी कमेटी के फैसले बहुमत वोटिंग के जरिए होने चाहिए और मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी को 2 महीने में एक बार मिलना चाहिए।
रिजर्व बैंक के कदम सही या गलत?
डीके जोशी अर्थशास्त्री, क्रिसिल ने बताया कि रिजर्व बैंक की पहल सही दिशा में है। ज्यादातर खुदरा महंगाई का ही असर आम आदमी पर होता है। पर महंगाई कम करने के लिए आरबीआई और सरकार को मिलकर कदम उठाने होंगे।
वैभव अग्रवाल वीपी, एंजेल ब्रोकिंग ने बताया कि रिजर्व बैंक ने वैश्विक मानकों के अनुसार यह पहल की है, पर भारत में तुरंत लागू करना आसान नहीं होगा। डेढ़-दो साल में इसे लागू किया जा सकता है। महंगाई कम करने की दिशा में आरबीआई के साथ सरकार को मिलकर कदम उठाने होंगे।