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अब पूरी दुनिया खाएगी भारत का चावल
नई दिल्ली
Updated Wed, 11 Sep 2013 12:50 PM IST
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जल्द ही पूरी दुनिया के लोग भारत का बासमती चावल फिर से खा सकेंगे। जी-20 बैठक के दौरान हुए बातचीत के सार्थक नतीजों के चलते रूस अब फिर से भारत से चावल का आयात शुरू करेगा।
इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल को बड़ी राहत मिलेगी।
रूस ने भारत से चावल और मूंगफली के आयात पर लगी रोक हटा ली है।
इस साल अच्छे मानसून के चलते धान की बढ़िया पैदावार की उम्मीद है।
रूस से प्रतिबंध हटने से कई दूसरे देशों को चावल निर्यात का रास्ता खुल जाएगा।
चालू वित्त वर्ष में अभी तक बासमती का निर्यात करीब 17 फीसदी बढ़ा है।
खापरा बीटल कीड़े के निशान मिलने के बाद रूस ने करीब आठ महीने पहले भारत से चावल के आयात पर रोक लगा दी थी।
इसी तरह की शिकायतें मूंगफली को लेकर थीं।
वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रूस ने गत एक सितंबर से भारतीय चावल और मूंगफली के आयात पर लगा अस्थायी प्रतिबंध हटा दिया है।
आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि क्वालिटी और वैश्विक मानकों को लेकर निर्यातक सजग हो रहे हैं।
इस साल मानसून अच्छा रहा है और अभी तक धान में किसी तरह का प्रकोप भी नहीं है। इससे पैदावार और निर्यात बढ़ेगा।
विश्व में बासमती की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका निर्यात 40 लाख टन तक पहुंच सकता है। सेतिया का मानना है कि रूस को सिर्फ 5 हजार टन चावल का निर्यात होता है फिर भी इस तरह का प्रतिबंध हटना एक अच्छा संकेत है।
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इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल को बड़ी राहत मिलेगी।
रूस ने भारत से चावल और मूंगफली के आयात पर लगी रोक हटा ली है।
इस साल अच्छे मानसून के चलते धान की बढ़िया पैदावार की उम्मीद है।
रूस से प्रतिबंध हटने से कई दूसरे देशों को चावल निर्यात का रास्ता खुल जाएगा।
चालू वित्त वर्ष में अभी तक बासमती का निर्यात करीब 17 फीसदी बढ़ा है।
खापरा बीटल कीड़े के निशान मिलने के बाद रूस ने करीब आठ महीने पहले भारत से चावल के आयात पर रोक लगा दी थी।
इसी तरह की शिकायतें मूंगफली को लेकर थीं।
वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रूस ने गत एक सितंबर से भारतीय चावल और मूंगफली के आयात पर लगा अस्थायी प्रतिबंध हटा दिया है।
आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि क्वालिटी और वैश्विक मानकों को लेकर निर्यातक सजग हो रहे हैं।
इस साल मानसून अच्छा रहा है और अभी तक धान में किसी तरह का प्रकोप भी नहीं है। इससे पैदावार और निर्यात बढ़ेगा।
विश्व में बासमती की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका निर्यात 40 लाख टन तक पहुंच सकता है। सेतिया का मानना है कि रूस को सिर्फ 5 हजार टन चावल का निर्यात होता है फिर भी इस तरह का प्रतिबंध हटना एक अच्छा संकेत है।
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