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सात राज्यों में अब हर साल महंगी होगी बिजली

Wed, 26 Sep 2012 11:21 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 26 Sep 2012 11:21 AM IST
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बिजली वितरण कंपनियों को दिया गया लगभग 2 लाख करोड़ का राहत पैकेज उपभोक्ताओं की जेबें ढीली कर सकता है। बिजली वितरण कंपनियों के कर्ज के पुनर्गठन के प्रस्ताव की मंजूरी के साथ ही केंद्र ने राज्य सरकारों पर इसका लाभ उठाने के लिए शर्तें भी लागू कर दी हैं। इनके चलते उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा सहित सात राज्यों को बिजली की दरों में सालाना 15 से 17 फीसद तक की बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री वीरप्पा मोइली ने इस बात की पुष्टि कर दी है।
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मोइली ने कहा है कि राहत पैकेज का लाभ उठाने वाले सभी राज्यों को हर साल बिजली की कीमत में वृद्घि करनी होगी। बिजली मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश को हर अब हर वर्ष बिजली की कीमतों में वृद्धि करनी पड़ेगी। राहत पैकेज में शामिल 70 फीसद बकाया इन सात राज्यों से संबंधित बिजली वितरण कंपनियों का ही है।
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माना जा रहा है कि इन राज्यों के पास इस पैकेज को स्वीकार करने के अलावा और कोई चारा नहीं है। अगर ये पैकेज को स्वीकार नहीं करते हैं तो इन राज्यों में बिजली की स्थिति और खराब होगी। बिजली वितरण कंपनियों पर बकाया राशि का बोझ बढ़ता जाएगा और आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा बकाया कर्ज का ब्याज चुकाने में ही चला जाएगा। पैकेज स्वीकार करने की प्रमुख शर्त यही है कि राज्यों को हर साल बिजली दरों को बिजली की लागत के मुताबिक बदलना होगा।
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पिछले एक साल में हरियाणा ने बिजली दरों में 19 फीसदी, पंजाब ने 11 फीसदी, राजस्थान ने 7.2 फीसदी, तमिलनाडु ने 37 फीसदी और आंध्र प्रदेश ने 20 फीसदी की वृद्धि की है। उत्तर प्रदेश में भी अधिकांश वर्ग में बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं। इसके बावजूद इनकी आर्थिक स्थिति नहीं सुधर पाई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इनके राजस्व का एक बड़ा हिस्सा (25 से 40 फीसद) कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाता है।
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