अब फल और सब्जियां रहेंगी तरोताजा और टिकाऊ

अरुणा अचल/शिमला Updated Mon, 01 Oct 2012 12:11 AM IST
Now keep fruits and vegetables fresh and durable
अब फल, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ लंबे समय तक तरोताजा रह सकेंगे। ऐसा संभव होगा नैनो टेक्नोलॉजी की बदौलत। इस तकनीक के जरिये वैज्ञानिक पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली ऐसी बायो फिल्म बनाने पर शोध करने जा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल करने से फलों व सब्जियों की सेल्फ लाइफ बढ़ जाएगी और किसान अपनी फसलों की मार्केटिंग बेहतर ढंग से कर सकेंगे। कृषि में शामिल करने के लिए इसके तकनीकी पहलुओं पर काम पूरा हो गया है।

एक अनुमान के अनुसार खेतों से उपभोक्ताओं तक फल व सब्जी पहुंचने के बीच लगभग 40 फीसदी माल सड़ जाता है। पैकिंग में बायो फिल्म्स के उपयोग से फल, सब्जियां, मांस, मछली आदि को अधिक समय तक तरोताजा रखा जा सकेगा। सड़न के कारण उनकी बर्बादी पर भी रोक लगेगी।

इस तकनीक से बनाए जाने वाले एग्रोकेमिकल उत्पादों के छिड़काव की मात्रा बेहद कम हो जाएगी। इससे फलों व सब्जियों में जहर का स्तर भी अपने आप कम हो जाएगा। नैनो तकनीक के जरिये कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) में देश भर के कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों से आए वैज्ञानिकों के साथ 12वें योजना आयोग के समक्ष बजट प्रस्ताव रखने के संबंध में बैठक की गई।

52 विवि व संस्थान मिलकर करेंगे काम
इस तकनीक पर देशभर के 52 विवि व संस्थान मिलकर काम करेंगे। तकनीक का प्रयोग पौधों व जानवरों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम में भी किया जाएगा। इससे केवल उसी भाग में दवा पहुंचाई जाएगी, जहां पर बीमारी हो।

कैसे काम करेगी नैनो तकनीक
नैनो तकनीक से बनने वाली हर चीज में सूक्ष्म कणों का इस्तेमाल होता है, जिसे नंगी आंखों से देखना संभव नहीं होता। जितने सूक्ष्म कण उतने ही अच्छे परिणाम। वैज्ञानिकों के अनुसार इन कणों का आकार जितना छोटा होता जाएगा उसके गुण भी बदलते रहेंगे और यही गुण इस तकनीक को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। कृषि क्षेत्र में उपयोग में लाए जाने वाले उत्पादों में यदि नैनो तकनीक का प्रयोग किया जाए तो किसानों व बागवानों को बहुत लाभ मिलेगा।

इस तकनीक को कृषि में अधिक से अधिक उपयोग में लाने से किसानों को काफी फायदा मिलेगा। वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बायो तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। नैनो टेक्नोलॉजी एक कदम आगे की तकनीक है। इस तकनीक को कृषि में शामिल करने के लिए इसके तकनीकी पहलुओं पर काम पूरा हो गया है। बजट से संबधित अंतिम दस्तावेज जल्द तैयार कर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को भेजा जाएगा।
-डॉ. बीर पाल सिंह, निदेशक, सीपीआरआई

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