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ई-कॉमर्स में एफडीआई की राह होगी आसान

Sat, 11 Oct 2014 12:30 AM IST
Updated Sat, 11 Oct 2014 12:30 AM IST
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now government give green signal to fdi in e-commerce sector.

फ्लिपकार्ट के बिग बिलियन डे बिक्री के खिलाफ केंद्र सरकार कोई कड़ा कदम उठाएगी इस बात की संभावना नहीं है। फ्लिपकार्ट इस दिन 600 करोड़ रुपये से अधिक के उत्पाद बेचने का दावा किया है और इस इवेंट का प्रबंधन सही तरीके से करने के लिए कंपनी का काफी आलोचना भी हो रही है।

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वास्तव में इस घटना से केंद्र सरकार ई-कॉमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देने के लिए तेजी से काम करने पर मजबूर हो सकती है।

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने परंपरागत रिटेलर्स सहित तमाम हलकों से ई रिटेलर द्वारा पेशकश की गई बड़े पैमाने पर छूट को लेकर मिली शिकायत की जांच के लिए कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं किया है।
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हालांकि, जानकारी मिली है कि किसी बड़े रिटेल कॉरपोरेट समूह या सैमसंग, एलजी सोनी या संबंधित कंपनियों ने उनके उत्पाद अधिकतम खुदरा मूल्य से कम कीमत पर बेचे जाने और बड़े पैमाने पर छूट की पेशकश को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
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सरकार नहीं करेगी ई-कॉमर्स सेक्टर में कोई हस्तक्षेप

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ऐसे में इस बात की संभावना नहीं है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करेगी। अगर सरकार ऐसा करेगी तो इसे ई-कॉमर्स पर रिटेल कारोबार बढ़ने में हस्तक्षेप के रूप में देखा जाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय में एक अधिकारी का कहना है कि सरकार छूट पर रोक या दरें नहीं तय कर सकती है। इसके बजाए सरकार में बैठे लोगों की राय बन रही है कि बाजार की ताकतों को कारोबार के तौर-तरीके तय करने दिया जाए और सरकार की ओर से न्यूनतम या कोई हस्तक्षेप नहीं चाहिए। खास कर ऐसे समय में जब मोदी सरकार देश में लालफीताशाही और लाइसेंस राज खत्म करने के लिए काम कर रही है।

हाल में कई मोबाइल कंपनियों और काफी समय से ऑटोमोबाइल कंपनियों में अपने प्रोडक्ट केवल ऑनलाइन प्लेटफार्म पर पेश करने का ट्रेंड देखा रहा है।

तेजी से बढ़ रहा है यह बाजार

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अमेजॉन हो फ्लिपकार्ट हो,स्नैपडील या ईबे सभी अग्रणी ब्रांड अपने उत्पाद लांच करने या छूट के साथ ऑनलाइन बिक्री के लिए इन कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं। एफडीआई पॉलिसी पर रोक पारंपरिक रिटेलर्स यानी किराना दुकानदारों को बचाने के लिए है।

केंद्र सरकार एफडीआई को अनुमति देने से मना करके रिटेलर्स के लिए पूंजी जुटाने की राह बंद कर रही है। निवेश के अभाव के कारण रिटेल चेन की ग्रोथ नहीं हो पा रही है। संगठित रिटेल का प्रसार बहुत कम है। संगठित रिटेल का कारोबार 31 लाख करोड़ रुपये के कुल बाजार का मात्र 10 फीसदी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल सेक्टर अगर इन बाधाओं को खत्म कर दिया जाए तो रिटेल सेक्टर के ग्रोथ की रफ्तार बहुत तेज हो सकती है। 2012 से रिटेल की ग्रोथ 19 फीसदी रही है और यह अगले पांच वर्ष में 20 फीसदी से ज्यादा दर से ग्रोथ हासिल कर सकता है। ई-कॉमर्स सेगमेंट इससे भी ज्यादा तेजी से ग्रोथ कर सकता है।

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