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दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के फैसले के मद्देनजर अब केंद्र सरकार भी देश भर के छात्रों को उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए साढ़े सात लाख रूपए का शिक्षा कर्ज बिना किसी थर्ड पार्टी गारंटी की सुविधा देने जा रही है। छात्रों के कर्ज लिए केंद्र सरकार खुद अपनी ओर से बैंक को गारंटी देगी।
साथ ही छात्रों को अब कर्ज चुकाने में भी आसानी होगी, क्योकि केंद्र सरकार शिक्षा कर्ज को लेकर मौजूदा नियमों को छात्रों के लिए सुगम करने जा रही है। वित्त मंत्रालय इस संबंध में औपचारिकता पूरी कर रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इस संबंध में केंद्र सरकार बड़ा ऐलान कर सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार साढ़े सात लाख रूपए तक के कर्ज पर कम से कम ब्याज दर का प्रावधान करने की भी योजना बना रही है।
अभी छात्रों को चार से साढ़े सात लाख रूपए का कर्ज लेने पर थर्ड पार्टी गारंटी की जरूरत होती है। अभी छात्रों को पाठ्यक्रम खत्म होने या फिर नौकरी लगने की तारीख में जो भी दिन पहले आता है उस दिन से छह महीने बाद से कर्ज चुकाने की किश्त शुरूआत हो जाती है। जिससे छात्रों और उनके परिवार पर कर्ज चुकाने का बोझ बढ़ जाता है।
मिलेगा एक साल का समय
इस बोझ के चलते कई छात्र अपने पाठ्यक्रम में बेहतर करने से भी चूक जाते हैं। मगर अब उसे एक साल का समय मिलेगा। साथ ही इस योजना के तहत शिक्षा पर कर्ज दो फीसदी के बेस रेट से ज्यादा ब्याज दर रखने का भी प्रस्ताव है। छात्रों को कर्ज चुकाने के लिए कुल 20 साल की अवधि मिलेगी। बैंक को कर्ज की गारंटी देने के लिए सरकार अब बाकायदा एक फंड तैयार करेगी।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि चार हजार करोड़ रूपए का यह कॉरपस फंड पांच साल के लिए बनाने की बात है। पहले वित्तीय साल में 500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया जाएगा। लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को इसमें शामिल करने की योजना है।
साथ ही कई निजी बैंकों को भी इससे जोड़ने को लेकर पहल की जाएगी। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार बैंकों द्वारा जारी कर्ज की 75 फीसदी रकम की गारंटी देगी और अगर कोई छात्र कर्ज वापस नहीं दे पाता तो मामले के मुताबिक बैंक के दावे का निपटारा भी किया जाएगा।