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पीएफ में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं

Tue, 11 Dec 2012 11:00 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 11 Dec 2012 11:00 PM IST
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not ignore the interests of employees in pf
केंद्र सरकार कर्मचारियों की भविष्य निधि (पीएफ) के मसले पर कोई भी फैसला लेते वक्त सबसे पहले कर्मचारियों के हित का ध्यान रखेगी। यह बात केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा (ईपीएफओ) पीएफ के नए नियमों की सिफारिश करने के बाद कही है।
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ईपीएफओ ने 30 नवंबर 2012 को जारी सर्कुलर में कहा है कि कर्मचारियों के पीएफ जमा करने के मौजूदा नियमों में बदलाव करने की जरूरत है। नए प्रावधानों के तहत नियोक्ता कर्मचारियों के मूल वेतन की जगह कुल वेतन यानी मूल वेतन के साथ-साथ दूसरे भत्ते को भी पीएफ जमा करने में शामिल करें। अभी नियोक्ता कर्मचारी के मासिक मूल वेतन का 12 फीसदी हिस्सा पीएफ के रूप में जमा करते हैं।

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ईपीएफओ नए बदलाव के जरिए नियोक्ताओं पर लगाम कसना  चाहता है। मंगलवार को श्रम मंत्री खड़गे ने भी कहा है कि कई कंपनियां कर्मचारियों के मूल वेतन को कम रखकर जहां पीएफ की  राशि बचाती है, वहीं कर चोरी भी करती हैं। सूत्रों के अनुसार, ईपीएफओ ने इन्हीं मुद्दों को देखते हुए नए नियम लागू करने की सिफारिश की है।
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हालांकि, नए नियम लागू होने से जहां कर्मचारियों के हाथ हर महीने कम वेतन आएगा, वहीं नियोक्ताओं को ज्यादा राशि पीएफ के रूप में जमा करनी होगी। इस कदम से कर्मचारियों के पीएफ बचत में जरूर बढ़ोतरी होगी। श्रम मंत्री के अनुसार, ईपीएफओ की इस सिफारिश पर बोर्ड अंतिम फैसला करेगा। जिसमें सबसे पहले सरकार कर्मचारी के हितों का ही ध्यान रखेगी।

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