फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   not down mobile call rates

अभी नहीं थमेगा मोबाइल कॉल दरों के बढ़ने का सिलसिला

Sun, 03 Feb 2013 09:04 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया Updated Sun, 03 Feb 2013 09:04 PM IST
विज्ञापन
not down mobile call rates

पिछले दिनों मोबाइल सेवा कंपनियों की ओर से बढ़ाई गई कीमत दरों के बावजूद फोन कॉल महंगी होने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। दरअसल, आने वाले दिनों में मोबाइल फोन कॉल दरें बढ़ाने के लिए मोबाइल कंपनियों के पास ढेरों वजह हैं।

विज्ञापन


डीजल कीमत में बढ़ोतरी, स्पेक्ट्रम की कीमत चुकाने और अब लाइसेंस का आवंटन सिर्फ नीलामी के जरिए होने जैसी वजहों से आने वाले दिनों में फोन कॉल दरें बढ़ना तय हो गया है। कंपनियों ने इन वजहों से कॉल दरों को बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
विज्ञापन


टेलीकॉम क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि पिछले दिनों बिना किसी बड़ी वजह से मोबाइल कॉल की दरों में इजाफा हुआ था। उस समय कंपनियों के सामने ऐसा कोई संकट नहीं था। मगर अगले कुछ महीनों में बाजार में स्थिति विपरीत हो सकती है। डीजल के मूल्य में बढ़ोतरी को लेकर टेलीकॉम क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल, मोबाइल फोन टावर के संचालन के लिए डीजल बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है। इंडस्ट्री सूत्र बताते हैं कि सभी कंपनियों के मोबाइल टावर सालाना 8,500 करोड़ रुपये की डीजल खपत करते हैं। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ने से टेलीकॉम जगत पर बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।

इसी तरह कंपनियों को आवंटित 2जी स्पेक्ट्रम का एकमुश्त शुल्क भी चुकाना है। दूरसंचार कंपनियों को बीस हजार करोड़ रुपये का एकमुश्त शुल्क भी अदा करना है। साथ ही अब स्पेक्ट्रम का आवंटन सिर्फ नीलामी के जरिए अनिवार्य हो गया है। नीलामी का आधार मूल्य बेहद ज्यादा होने के चलते भी कॉल दरें बढ़ने की संभावना बनी रहती हैं।

टेलीकॉम विशेषज्ञ महेश उप्पल कहते हैं कि दाम बिलकुल बढ़ेंगे और बढ़ भी रहे हैं। कंपनियों के बढ़ते खर्चों की वजह से भी दाम बढ़ रहे हैं। चाहे स्पेक्ट्रम का मूल्य हो या फिर डीजल की कीमत। अपने खर्चों को कवर करने के लिए जाहिर है कंपनियां इसे ग्राहकों से वसूलने की कोशिश करेंगी और वे कर भी रही हैं।


अब यह देखना है कि ऐसी हालत में कुछ कंपनियां इस बढ़ोतरी का फायदा उठाएंगी या वह भी अपनी कॉल दरों की कीमत बढ़ा लेंगी। मगर विपरीत स्थितियों में कंपनियां बाजार की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए मनमाने तरीके से कॉल दरें बढ़ा नहीं पाएंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed