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अभी भी 56 हजार गांवों में नहीं बजती मोबाइल की घंटी

Sun, 26 May 2013 12:36 AM IST
नई दिल्ली/रक्षित सिंह
नई दिल्ली/रक्षित सिंह Updated Sun, 26 May 2013 12:36 AM IST
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no mobile in 56 thousand villages of india

देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या भले ही 90 करोड़ के आसपास हो, लेकिन अभी भी 56 हजार गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल की घंटी नहीं बजती।

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वजह है कि इन इलाकों में कोई भी मोबाइल कंपनी अपनी सेवाएं नहीं देना चाहती। कम ग्राहक होने या फिर अन्य दिक्कतों के चलते इन गांवों में कंपनियों के लिए सेवाएं देना फायदे का सौदा नहीं है। इसलिए, इन गांवों में अभी तक मोबाइल टावरों की रेंज पहुंची ही नहीं है।

लेकिन, अब डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डॉट) इन गांवों में मोबाइल सेवाएं पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक उम्मीद है कि इन सभी गांवों मे मोबाइल सेवाएं पहुंच जाएंगी। इस परियोजना की फंडिंग यूएसओ फंड से की जाएगी। इस योजना पर सी-डॉट के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
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यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (यूएसओ) फंड एडमिनिस्ट्रेटर एन. रवि शंकर ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि देश में अभी भी 56 हजार गांव ऐसे हैं, जो मोबाइल कवरेज से छूटे हुए हैं।
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इनमें से अधिकांश गांव दूर-दराज के दुर्गम इलाकों में स्थित हैं। इसके अलावा इन गांवों में आबादी भी बेहद कम है। लिहाजा, किसी भी मोबाइल कंपनी के लिए यहां बिजनेस केस नहीं बनता और इसलिए यहां अभी तक सेवाएं नहीं पहुंची हैं।

शंकर ने बताया कि यूएसओ फंड सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के साथ मिलकर इन गांवों में मोबाइल सेवाएं देने की परियोजना पर काम कर रहा है। फिलहाल इस परियोजना को लागू करने के तकनीकी पहलुओं पर काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान हम इस परियोजना की स्वीकृति करवा लेंगे। इस परियोजना पर आने वाले खर्च के बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल इसका आकलन किया जा रहा है। इस योजना की फंडिंग यूएसओ फंड से की जाएगी।


गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल सेवाएं देने के लिए डॉट ने यूएसओ फंड बनाया है। सभी टेलीकॉम कंपनियां से उनके एडजस्टिड ग्रॉस रेवन्यू का 5 फीसदी हिस्सा यूएसओ फंड के लिए जाता है।

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