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बड़े कदमों के बिना भी सकारात्मक है बजट: एचएसबीसी
एजेंसी
Updated Fri, 11 Jul 2014 08:02 PM IST
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बजट में बड़ी घोषणाएं नहीं हैं। कुल मिलाकर बजट से सकारात्मक संकेत मिल रहा है। इससे देश में बने बेहतर माहौल को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।
वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी एचएसबीसी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने पर अड़ी रही और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बेहतहर संकेत दिया है। इससे शेयर बाजार में कारोबारी धारणा मजबूत बनी रहेगी।
अपना पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मौजूदा आर्थिक स्थिति एक बड़ी चुनौती पेश करती है और इसका सामना करने के लिए वित्तीय मामलों में सोच समझ कर कदम उठाने की जरूरत है, जिससे वित्तीय मजबूती को बढ़ावा मिलेगा। सरकार 2014-15 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.1 फीसदी के स्तर पर रखने का लक्ष्य बरकरार रखा है और 2016-17 तक इसे और कम करके 3 फीसदी के स्तर पर लाया जाएगा।
एचएसबीसी ने अपने रिसर्च नोट में कहा है कि बजट में कुछ आश्वस्त करने वाले कदम उठाए गए हैं और सरकार ने बजट में ऐसे सुधारों का संकेत भी दिया है, जिन्हें अगले तीन वर्ष में 8 फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल करने के लिए लागू करना होगा।
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इस बीच सिटीगुप ने एक रिसर्च नोर्ट में कहा है कि हमारा मानना है कि वित्त मंत्री ने राजनीतिक रूप से विवाद पैदा करने वाले किसी भी मुद्दे से परहेज करते हुए सतर्क रवैया अपनाया है। हालांकि यह स्पष्ट है कि उन्होंने बाजार की उम्मीदों से ज्यादा वित्तीय सावधानी दिखाई है।
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वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी एचएसबीसी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने पर अड़ी रही और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बेहतहर संकेत दिया है। इससे शेयर बाजार में कारोबारी धारणा मजबूत बनी रहेगी।
अपना पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मौजूदा आर्थिक स्थिति एक बड़ी चुनौती पेश करती है और इसका सामना करने के लिए वित्तीय मामलों में सोच समझ कर कदम उठाने की जरूरत है, जिससे वित्तीय मजबूती को बढ़ावा मिलेगा। सरकार 2014-15 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.1 फीसदी के स्तर पर रखने का लक्ष्य बरकरार रखा है और 2016-17 तक इसे और कम करके 3 फीसदी के स्तर पर लाया जाएगा।
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एचएसबीसी ने अपने रिसर्च नोट में कहा है कि बजट में कुछ आश्वस्त करने वाले कदम उठाए गए हैं और सरकार ने बजट में ऐसे सुधारों का संकेत भी दिया है, जिन्हें अगले तीन वर्ष में 8 फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल करने के लिए लागू करना होगा।
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इस बीच सिटीगुप ने एक रिसर्च नोर्ट में कहा है कि हमारा मानना है कि वित्त मंत्री ने राजनीतिक रूप से विवाद पैदा करने वाले किसी भी मुद्दे से परहेज करते हुए सतर्क रवैया अपनाया है। हालांकि यह स्पष्ट है कि उन्होंने बाजार की उम्मीदों से ज्यादा वित्तीय सावधानी दिखाई है।