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एफडीआई बढ़ने से बाजार में उतरेंगी नई टेलीकॉम कंपनियां
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2013 07:10 PM IST
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टेलीकॉम क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़कर 100 फीसदी होने से नई टेलीकॉम कंपनियां भारतीय बाजार में उतर सकती हैं।
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टेलीकॉम उद्योग के जानकारों का कहना है कि 100 फीसदी एफडीआई खुलने से दुनिया की कई दिग्गज कंपनियां भारतीय बाजार में कदम बढ़ा सकती हैं।
इसके अलावा कई मौजूदा कंपनियां अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं या फिर अपनी हिस्सेदारी कम भी कर सकती हैं।
एसोसिएशन ऑफ यूनिफाइड टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (ऑस्पी) के पूर्व सेक्रेट्री जनरल एससी खन्ना का कहना है कि टेलीकॉम क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़कर 100 फीसदी होने के चलते कई विदेशी टेलीकॉम दिग्गज भारतीय बाजार में उतर सकते हैं।
इनमें अरब देशों में संचार सेवाएं मुहैया कराने वाली टेलीकॉम कंपनियां सबसे आगे रह सकती हैं। इसके अलावा अमेरिकी कंपनियां भी भारतीय बाजार में उतर सकती हैं। खन्ना ने बताया कि 100 फीसदी एफडीआई से टेलीकॉम उद्योग में स्पष्टता आएगी।
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इसके अलावा कई मौजूदा कंपनियां एफडीआई की सीमा बढ़ने के चलते अपनी मौजूदा हिस्सेदारी को बढ़ा भी सकती हैं। इनमें टेलीनॉर, एमटीएस और एयरसेल प्रमुख हैं। इसके अलावा नई टेलीकॉम कंपनियों के बाजार में उतरने के चलते कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसका फायदा टेलीकॉम ग्राहकों को होगा।
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टेलीकॉम वॉचडॉग के सेक्रेट्री अनिल कुमार ने बताया कि एफडीआई की सीमा बढ़कर 100 फीसदी होने से कई नई टेलीकॉम कंपनियां मौजूदा कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद सकती हैं। इसके अलावा कई मौजूदा कंपनियां अपने निवेश को नियमित कर सकती हैं।
कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी के पार्टनर-टेलीकॉम जयदीप घोष का कहना है कि टेलीकॉम क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 100 फीसदी किया जाना निश्चित तौर पर सकारात्मक कदम है। जिन टेलीकॉम कंपनियों में विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर की अधिकतम हिस्सेदारी है, उनमें कुछ कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।
वहीं, उद्योग चैंबर सीआईआई का कहना है कि टेलीकॉम क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ने से घरेलू ऑपरेटरों को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी।