नए उद्योगों को कर अदायगी के लिए ब्याज मुक्त कर्ज
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नए उद्यमियों को लुभाने में प्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। राज्य सरकार की हालिया औद्योगिक नीति के मुताबिक अगर कोई उद्यमी पूर्वांचल (फैजाबाद, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, देवीपाटन और बस्ती), मध्यांचल (कानपुर, लखनऊ) और बुंदेलखंड (झांसी, चित्रकूट) में 5 करोड़ रुपये के स्थायी पूंजी निवेश (भूखंड और मशीनरी लागत समेत) से नई इकाई लगाता है, तो उसे पहली बिक्री तिथि से अगले 10 साल तक जमा होने वाले वैट और केंद्रीय बिक्री कर (सेंट्रल सेल्स टैक्स) के बराबर फंड ब्याज मुक्त कर्ज के रूप दिया जाएगा।
इस ब्याज मुक्त कर्ज का भुगतान कर्ज मिलने की तारीख से 7 साल बाद करना होगा। खाद्य प्रसंस्करण और पशु संपदा क्षेत्र में लगने वाली नई इकाई भी रियायत के दायरे में आएगी। इन पर स्थान (लगने वाली इकाई की जगह) संबंधी शर्तें लागू नहीं होंगी। कमिश्नर एंड डायरेक्टर (इंडस्ट्रीज), उत्तर प्रदेश सीताराम मीणा का कहना है कि यह स्कीम वर्किंग कैपिटल के रूप में कंपनियों और उद्यमियों दोनों के लिए खासी मददगार होगी। इससे किसी भी उद्यमी पर कारोबार की शुरुआत में अचानक वैट और सेल्स टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा। इन रियायतों की बदौलत प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा लोग इंडस्ट्री लगाएंगे और नए रोजगार के मौके बनेंगे।
पूर्वांचल, मध्यांचल और बुंदेलखंड के अतिरिक्त दूसरे जिलों में लगने वाली नई इकाइयों में 12.5 करोड़ रुपये की स्थायी पूंजी लगाने पर ही इस रियायत का फायदा मिलेगा। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट जुगुल किशोर का कहना है कि इससे इंडस्ट्री की लिक्विडिटी बढ़ेगी और दूसरे प्रदेशों के उद्यमी भी यहां उद्योग लगाएंगे। प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीतियां इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित होगी। उद्योग विभाग के सूत्रों का कहना है कि अपने कारोबार का विस्तार करने वाली इकाइयों को भी निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत वैट और सेंट्रल सेल्स टैक्स के बराबर इंटरेस्ट फ्री लोन देने के लिए जल्द ही योजना तैयार की जाएगी।
गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के मुकाबले उद्योगपतियों को लुभाने में उत्तर प्रदेश पीछे छूट गया था। हालांकि नए सिरे से कोशिशें शुरू हुईं हैं। सरकार की इस योजना से उद्योगों को वित्तीय मदद मिलेगी। नई शुरुआत करने वाले उद्योगों के लिए यह बहुत अच्छी स्कीम है। सरकार की ओर से मिलने वाले ऐसे प्रोत्साहनों की बदौलत कंपनियों को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।
-अंजन रॉय, फिक्की के पूर्व इकनॉमिक एडवायजर