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कोयले पर नए फार्मूले से बढ़ सकती हैं बिजली की दरें

Fri, 04 Jul 2014 09:38 PM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Fri, 04 Jul 2014 09:38 PM IST
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new formula on coal may rise power tariff

वित्त मंत्रालय ने कोयला सेक्टर के लिए इंपोर्ट पैरिटी प्राइसिंग (आईपीपी) यानी कोयले के आयात मूल्य निर्धारण में समानता लाने का समर्थन करते हुए कोयला मंत्रालय से इस प्राइसिंग मॉडल को अपनाने की संभावना का परीक्षण करने को कहा है।

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हालांकि इस प्राइसिंग फार्मूले से बिजली की कीमतें बढ़ने की आशंका है। वहीं वित्त मंत्रालय का मानना है कि आईपीपी से कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का मुनाफा बढ़ सकता है और इससे वह घरेलू आपूर्ति के विस्तार के लिए जरूरी निवेश करने की स्थिति में आ पाएगा।
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अमर उजाला के पास मौजूद अंतर मंत्रालयी समूह की (आईमजी) बैठक के आंतरिक नोट के अनुसार कोयला मंत्रालय से इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट बना कर सचिवों की समिति (सीओएस) के विचार के लिए औपचारिक नोट भेजने को भी कहा गया है। आईएमजी का मानना है कि घरेलू कीमतो
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 को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ जोड़ने से खुदरा स्तर पर सब्सिडी के लिए जरूरी मानक तय करने में मदद मिलेगी। यह एक वास्तविकता है कि भारत में कोयले का खनन कई कोयला उत्पादक देशों की तुलना में कम कार्यकुशल और तकनीकी तौर पर पिछड़ा है। इसके  पीछे अहम कारण कोयले की कम कीमत को बताया जा रहा है। कोयले की कीमतें सीआईएल की अधिसूचित कीमत से तय की जाती है। यह कोयला सेक्टर में निवेश की राह में बड़ी बाधा है। कोयला सेक्टर के लिए आईपीपी को इस समस्या के समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक में वित्त सचिव अरविंद मायाराम ने कहा कि सबसे ज्यादा राजस्व हिस्सेदारी के आधार पर इस प्राइसिंग मॉडल को अपनाने से बाजार की विसंगति को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए मायाराम ने कहा कि कोयले की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों के स्तर पर लाने से भारत में खनन को प्रोत्साहन मिलेगा और इसके नतीजे के तौर पर बड़ी कंपनियां कोयला सेक्टर में निवेश करेंगी।

एक तरफ आईएमजी ने भारत में कोयला खनन में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत पर जोर दिया, जिसे कोयले के लिए प्रस्तावित आईपीपी से हासिल किया जा सकता है। दूसरी ओर व्यय विभाग के सचिव रतन पी वातल ने इसके परिणामस्वरूप बिजली की कीमतें बढ़ने को लेकर चिंता जताई।

भारत में 60 फीसदी बिजली का उत्पादन कोयले के जरिये होने की बात का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कोयले की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या आयातित कीमत के स्तर पर लाने से बिजली की कीमतें बढ़ेंगी। कोयले की कीमतों को दूसरे ईंधन की तरह अंतरराष्ट्रीय कीमतों के स्तर पर लाने का समर्थन न करते हुए वातल ने कहा कि कोयला, पेट्रोलियम और गैस प्राकृतिक रूप से काफी अलग हैं। हालांकि उन्होंने माना कि कोयले की कीमतें कम हैं और इस पर सीआईएल का एकाधिकार है, वहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतें कुछ हद तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बराबर हैं।
व्यय विभाग द्वारा उठाई गई चिंताओं के समाधान को लेकर मायाराम ने कहा कि घरेलू कोयले की कीमतों को अंतराराष्ट्रीय कीमतों के स्तर लाने से बिजली की दरें बढ़ने के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए मूल्य स्थिरता कोष की तर्ज पर एक कोष का इस्तेमाल किया जा सकता है। वित्त सचिव ने कहा कि आईपीपी अपनाने से ईंधन की बढ़ी कीमतों को क्रॉस सब्सिडाइज करने के लिए एक कोष बनाया जा सकता है। इससे बिजली की कीमतों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।

देश में कोयले के अधिकतम उत्पादन की राह में बड़ी बाधा पर्याप्त रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता न होना है। आईएमजी का मानना है कि कोयले के लिए आईपीपी को अपना कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। जब कोयले की घरेलू कीमतें आयातित कीमतों के बराबर होंगी, तो दूर-दराज स्थित खदान से कोयला मंगाने के बजाय तटवर्ती पावर प्लांट के लिए कोयले का आयात करना ज्यादा मुफीद होगा।


इससे कोयले के परिवहन की जरूरतें कम होंगी और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ भी घटेगा। इसके अलावा तटवर्ती पावर प्लांटों द्वारा आयातित कोयले का इस्तेमाल करने से गैर-तटवर्ती प्लांटों के लिए अतिरिक्त घरेलू आपूर्ति उपलब्ध होगी।

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