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छोटे सेज के लिए बड़ी राहतों का ऐलान
नई दिल्ली/ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Apr 2013 10:18 PM IST
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निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कई रियायतों का ऐलान किया है। इनसे सबसे ज्यादा फायदा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) और टेक्सटाइल क्षेत्र को मिलेगा। अब सेज के लिए पहले से आधी जमीन की जरूरत होगी, जबकि आईटी सेज के लिए जमीन की न्यूनतम अनिवार्यता का पूरी तरह समाप्त हो गई है।
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सरकार ने 2 फीसदी ब्याज छूट और जीरो ड्यूटी एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) योजना का दायरा बढ़ा दिया है। कई राहतों और सुधारों की घोषणा के बावजूद सरकार ने निर्यातकों की और सस्ते कर्ज, सेज से मैट घटाने और एक्सपोर्ट फंड बनाने की मांग नहीं मानी है।
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बृहस्पतिवार को विदेश व्यापार नीति (2009-14) की सालाना समीक्षा जारी करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। सेज की ओर निवेशकों का रुझान बढ़ाने के लिए रिफॉर्म पैकेज दिया जा रहा है।
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विभिन्न प्रकार के लिए सेज अब पहले से आधी भूमि की जरूरत होगी। मल्टी प्रोडक्ट सेज 1,000 के बजाय 500 हेक्टेअर और क्षेत्र आधारित सेज 100 के बजाय 50 एकड़ में बन सकेंगे। आईटी सेज के लिए भूमि की न्यूनतम सीमा को पूरी तरह खत्म कर दिया है। आईटी सेज के बिल्ट अप एरिया में भी काफी छूट दी गई है।
सेज से हाथ खींचने के इच्छुक डेवलपरों को सरकार ने इसका रास्ता भी दे दिया है। इन रियायतों की घोषणा करते हुए उद्योग मंत्री ने कहा कि छह महीने बाद विदेश व्यापार नीति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ी, तो सरकार निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए और कदम उठाएगी।
कृषि, वन और गांव से जुड़े उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने के लिए विशेष कृषि ग्राम उद्योग योजना के तहत 5 फीसदी ड्यूटी स्क्रिप्स का ऐलान किया है। जीरो क्रेडिट ड्यूटी ईपीसीजी व इंक्रीमेंटल एक्सपोर्ट प्रोत्साहन योजनाएं इस साल भी जारी रहेंगी। स्पोर्ट्स गुड्स में 5 और वस्तुओं को ड्यूटी फ्री किया गया है।
टेक्सटाइल पर सरकार मेहरबान
जट की तरह व्यापार नीति में भी सरकार ने टेक्सटाइल क्षेत्र को काफी तवज्जो दी है। अब 2 फीसदी ब्याज छूट का फायदा कई अन्य टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उत्पादों को भी मिलेगा। सरकार ने जीरो ड्यूटी ईपीसीजी स्कीम का फायदा भी सभी क्षेत्रों को देने का फैसला किया है।
टेक्नॉलजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम का फायदा उठा रहे टेक्सटाइल निर्यातकों को भी इसका लाभ मिलेगा। फोकस प्रोडक्ट स्कीम में 126 और मार्केट लिंक्ड फोकस प्रोडक्ट स्कीम में 47 नए उत्पाद शामिल किए गए हैं। इनमें इंजीनियरिंग, कैमिकल और फार्मा के अलावा टेक्सटाइल उत्पाद भी शामिल हैं।
अप्रैल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल का कहना है कि इस तरह की मदद से टेक्सटाइल के अलावा गारमेंट और हैंडलूम क्षेत्र के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
उभरते बाजारों की राह पर निर्यात
दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के उभरते बाजारों ने देश के निर्यात में नई जान फूंकी है। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा का कहना है कि वर्ष 2012-13 के दौरान कुल निर्यात में इन देशों का 65 फीसदी रहा है।
नए बाजारों की संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने नार्वे को फोकस मार्केट और वेनेजुएला को स्पेशल फोकस मार्केट योजना में शामिल किया है। इसके अलावा इंक्रीमेंटल एक्सपोर्ट इंसेटीवाइजेशन स्कीम को मार्च 2014 तक बढ़ाते हुए इसमें दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के 53 देशों को शामिल किया गया है।
बड़ी राहतों का अभी इंतजार
कई रियायतों के बावजूद निर्यातकों की सस्ते कर्ज और ट्रांजेक्शन कॉस्ट में कमी की मांग अधूरी रह गई है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एम. रफीक अहमद का कहना है कि इन रियायतों से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फंड, निर्यातकों के कर्ज को प्राथमिकता क्षेत्र में लाने और ट्रांजेक्शन खर्च में कटौती जैसे बड़े मुद्दे बाकी रह गए हैं।
निर्यात 300 अरब डॉलर पहुंचा
मार्च के दौरान निर्यात में करीब 7 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ देश का निर्यात 300.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो इससे पहले साल की तुलना में 1.76 फीसदी कम है।
साल के आखिरी महीनों में निर्यात सुधरने से व्यापार घाटा भी 190.91 फीसदी तक सीमित रहा है। इस साल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट 57 अरब डॉलर, टेक्सटाइल 26 अरब डॉलर और फार्मा एक्सपोर्ट 15 अरब डॉलर रहा है। इस बार सरकार ने निर्यात में वृद्धि के लक्ष्य का ऐलान नहीं किया है।