व्यावसायिक क्षेत्र नेहरू प्लेस नो हॉकिंग जोन
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राजधानी का व्यवसायिक क्षेत्र नेहरू प्लेस नो हॉकिंग जोन है। अदालत ने कहा किसी भी हॉकर व वेंडर को खुले में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने हॉकरों की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश डी.मुरूगेसन व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलो की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि नेहरू प्लेस क्षेत्र में हॉकर व वेंडर की गतिविधियां गैरकानूनी है। उन्होंने कहा नेहरू प्लेस को पहले ही नो हॉकिंग जोन घोषित किया जा चुका है। इस आधार पर इस क्षेत्र में खुले में किसी भी हॉकर व वेंडर को काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
खंडपीठ ने उर्मिला देवी नामक हॉकर द्वारा सिंगल जज के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। उर्मिला ने नेहरू प्लेस व्यवसायिक कोंपलैक्स में काम करने की अनुमति देने का आग्रह किया था। उसने तर्क रख था कि वह वर्षो से वहां एमसीडी द्वारा जारी तहबाजारी के तहत अपना काम कर रही है। उसे इस प्रकार हटाना उसके काम करने के अधिकार का हनन है।
खंडपीठ ने कहा शहरी स्ट्रीट वेंडर राष्ट्रीय पोलिसी के तहत किसी को भी नो हॉकिंग जोन में गतिविधियां जारी रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा याची की अपील पहले ही क्षेत्रीय वेंडर कमेटी खारिज कर चुकी है। डीडीए ने याची के तर्को का विरोध करते हुए कहा याची नेहरू प्लेस में स्थाई रूप से बैठने के लिए अधिकृत नहीं थी। एमसीडी ने भी याची के तर्क को गलत बताते हुए नेहरू प्लेस उनके अधिकार क्षेत्र में ज्यादा समय नहीं रहा। वर्ष 2002 में इसे डीडीए के सुपुर्द कर दिया गया था। इसके अलावा याची वैध तहबाजारी होल्डर नहीं थी।
याची के अधिवक्ता ने डीडीए व एमसीडी के तर्को को गलत बताया। उन्होंने कहा उनकी मुवक्किला को वहां बैठने का अधिकार है, मगर खंडपीठ ने उनके तर्को को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इससे पूर्व भी खंडपीठ नेहरू प्लेस के काफी हॉकरों की याचिका खारिज कर चुकी है जिन्हें डीडीए ने वर्ष 2007 में वहां से हटा दिया था।