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कोयला और ऊर्जा सेक्टर में बड़े सुधारों की जरूरत

Wed, 13 Aug 2014 08:47 PM IST
सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, दिल्ली
सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 13 Aug 2014 08:47 PM IST
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need of big reform in coal and energy sector

कोयला, बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी लाने के उपाय सुझाने के लिए गठित विशेषज्ञों का पैनल इस क्षेत्र में बड़े नीतिगत बदलावों के पक्ष में है। सुरेश प्रभु की अगुवाई में गठित पैनल अपनी रिपोर्ट में सरकार से कई बड़े बदलाव करने की सिफारिश कर सकता है। पैनल की सबसे अहम सिफारिश कोयला उत्खनन परियोजनाओं को वन संबंधी मंजूरियों से मुक्त रखने की हो सकती है। ऐसा होने पर कोयला खानों से उत्पादन शुरू करने में लगने वाले लंबे वक्त को घटाकर काफी कम किया जा सकेगा।

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इसके अलावा सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआई) को कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के नियंत्रण से हटाकर सीधे कोयला मंत्रालय के अधीन लाने का सुझाव भी विशेषज्ञों के पैनल की ओर से सरकार को दिया जा सकता है। इसके अलावा देश की कोयला खानों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों से परामर्श लेने की बात भी सुरेश प्रभु पैनल की रिपोर्ट में शामिल हो सकती है।
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देश की विभिन्न कोयला खानों में उत्खनन शुरू करने के लिए कोयला मंत्रालय अकसर वन एंव पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जल्द मंजूरी दिए जाने पर जोर देता रहा है। माना जा रहा है कि सुरेश प्रभु की अध्यक्षता वाला पैनल इसे खत्म करने के पक्ष में है। ऐसे में पैनल कोयला खानों को वन संबंधी मंजूरी से मुक्त करने की सिफारिश कर सकता है। कायेला खानों में उत्खनन के लिए वन मंत्रालय से मंजूरी लेने के बजाय पैनल खानों में उत्खनन के दौरान नियमों का उल्लंघन होने पर जांच कराए जाने का पक्षधर है। पैनल का मानना है कि यह तरीका अपना कर कोयले के उत्खनन की प्रक्रिया में तेजी लाकर देश में कोयले का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
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जानकारी के मुताबिक पैनल का मानना है कि मौजूदा प्रणाली के तहत किसी कोयला खान से कोयले की खुदाई शुरू करने में अभी 10 साल तक का लंबा वक्त लग जाता है। पैनल इस अवधि को कम करने के उपायों पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रहा है। पैनल कोयला कंपनियों के प्रदर्शन की गहन समीक्षा किए जाने का भी पक्षधर है, जिससे कि यह पता किया जा सके कि किन प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए किन क्षेत्रों में और दक्षता लाए जाने की जरूरत है। प्रदर्शन के यह मानदंडों पर सीआईएल की इकाईयों के प्रदर्शन की तुलना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से की जाने की राय भी इस पैनल की है। इससे कोयला कंपनियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाकर कोयले की आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है।

इसके अलावा पैनल देश में कोयला उत्खनन की प्रक्रिया को ज्यादा दक्षतापूर्ण बनाने के लिए इस क्षेत्र में कार्यरत संस्थान सीएमपीडीआई को कोल इंडिया के नियंत्रण से निकाल कर सीधे कोयला मंत्रालय के अधीन लाने के पक्ष में है। पैनल का मानना है कि ऐसा करने से कोल इंडिया के अलावा अन्य कोयला कंपनियों को भी इस इंस्टीट्यूट की सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसके अलावा सीएमपीडीआई के क्षेत्रीय संस्थानों को उस क्षेत्र में कार्यरत सीआईएल की सहायक इकाइयों से जोड़ने की सिफारिश भी की जा सकती है।


पैनल का मानना है कि देश में कोयले का उत्पादन बढ़ाने के लिए कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में कोई मूलभूत ढांचागत बदलाव करने की जरूरत नहीं है। केवल पूंजीगत खर्चों और कामकाज की प्रणाली में लचीलापन लाकर कोयला उत्खनन में काफी दक्षता लाई जा सकती है। पैनल फैसले लेने को लेकर सीआईएल की सहायक कंपनियों की कोल इंडिया पर निर्भरता को कम कर कर इन इकाइयों को छूट देने का पक्षधर है, पर साथ ही इन इकाइयों की जवाबदेही भी बढ़ाने की राय भी रखता है।

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