भारतीय महिला बैंक में मिलेगी 200 को नौकरी
एक नई सोच के साथ शुरू किए गए भारतीय महिला बैंक का मकसद महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण है। इस मकसद को पूरा करने के लिए जहां महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने के लिए नए बैंकिंग उत्पाद तैयार किए गए हैं। यह कहना है देश के सबसे नए बैंक भारतीय महिला बैंक की पहली चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) ऊषा अनंथसुब्रमण्यम का।
बैंक की योजनाओं और उसकी रणनीति पर अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह और प्रमुख संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव ने ऊषा अनंथसुब्रमण्यम से लंबी बातचीत की। पेश है इसके मुख्य अंश-
मेरे लिए यह पद चुनौती की तरह है
प्रश्न- भारतीय महिला बैंक खोलने का क्या उद्देश्य है? साथ ही देश के इस सबसे नये बैंक की पहली प्रमुख होने का मौका आपको मिला है उस पर आप क्या कहेंगी।
उत्तर-भारत में लगभग 50 फीसदी महिलाएं है। वह बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों में शामिल रहती हैं लेकिन उनके काम को पूरी तरह से आर्थिक गतिविधि के रूप में स्वीकार्यता नहीं मिली है।
उन्हें पुरूष को सहयोग करने वाली के रूप में ही देखा जाता है। जबकि सचाई यह है कि महिलाओं में उद्यमिता का गुण होने के साथ ही वह एक बेहतर बचतकर्ता भी होती हैं। ऐसे में महिला बैंक के जरिए हम महिलाओं को उद्यमी, कारोबारी और बचत के बेहतर विकल्पों के साथ उनके वित्तीय सशक्तिकरण को बढ़ावा देंगे।
इस बैंक की स्थापना के पीछे यही मूल सोच है। जहां तक मुझे पहली सीएमडी बनने का मौका मिलने की बात है तो बैंक की स्थापना के लिए बनी समिति के समय से ही मैं इसका हिस्सा थी और मेरे लिए यह पद चुनौती की तरह है।
क्या यह बैंक केवल महिलाओं के लिए ही है?
प्रश्न-क्या यह बैंक केवल महिलाओं के लिए ही बैंक है?
उत्तर- यह बैंक केवल महिलाओं के लिए है, ऐसी बात नहीं है। पर एक बात है जब कर्ज देने की बात आएगी तो हम अधिक से अधिक महिलाओं को कर्ज देंगे।
मसलन अगर हमें 100 रुपये कर्ज देना है, तो हम 70 रुपये महिलाओं को कर्ज देंगे। महिला बैंक में नियुक्तिओं में महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी। महिला कर्मियों के चलते महिलाएं वित्तीय कामकाज के लिए बैंक आने में ज्यादा सहज महसूस करेंगी।
महिलाओं को कर्ज देने का क्या मॉडल है?
प्रश्न-महिलाओं को कर्ज देने का क्या मॉडल है, कर्ज में उन्हें कैसे प्राथमिकता मिलेंगी?
उत्तर-बैंक केवल छोटे -छोटे कर्ज देकर विकास नहीं कर सकता है। हमने कारपोरेट लोन भी देने हैं। अगर किसी कंपनी की प्रमुख महिला है, या कंपनी में 40 फीसदी महिलाएं काम कर रही हैं, कोई व्यक्ति महिलाओं के रोजगार को बढ़ावा देने का काम कर रहा है, तो यह सभी बैंक के कर्ज देने की प्राथमिकता में होंगे।
हमने महिलाओं को ध्यान में रखकर खास उत्पाद बनाए हैं, जैसे डे-केयर (पालना घर), ब्यूटी पार्लर, कैटरिंग ,बुटीक जैसे काम करने वाली महिलाओंको हम कर्ज देंगे।
कैटरिंग लोन के तहत हम महिलाओं को 50 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का कर्ज देंगे। इसके अलावा हमने इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंट आफ इंडिया (आसीएआई) के साथ छात्रों को एजुकेशन लोन देने का समझौता किया है। जिसमें लड़कियों को एक फीसदी कम दर पर एजुकेशन लोन मिलेगा। प्रोफेशनल सीए को भी ऑफिस बनाने के लिए भी कर्ज मिलेगा, इसमें महिला सीए को ब्याज में छूट मिलेगी।
बैंक में भर्ती की क्या योजना है?
प्रश्न-बैंक में भर्ती की क्या योजना है, इसमें महिलाओं को कैसे प्राथमिकता मिलेगी?
उत्तर-अभी तक 100 अधिकारियों की भर्ती की गई है। पर अभी ज्यादातर वरिष्ठ अधिकारी डेपुटेशन पर दूसरे बैंकों से आए है। हमें एक कैडर बनाना है। हम जल्द ही नई नियुक्ति करेंगे।
नई नियुक्तियों में ऐसी महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जो महिलाएं बैंकिंग क्षेत्र में काम का अनुभव रखती हैं और शादी, या दूसरी वजह से नौकरी छोड़ चुकी हैं, उन्हें हम प्राथमिकता देंगे क्योंकि हमें अनुभवी कर्मियों की जरूरत है। छह महीने में हम करीब 200 नए लोगों की भर्ती करेंगे।
बैंक की शाखाओं के विस्तार की क्या योजना है?
प्रश्न- बैंक की शाखाओं के विस्तार की योजना है, सुदूर क्षेत्रों में कैसे पहुंचेंगे?
उत्तर-अभी बैंक की नौ शाखाएं हैं। मार्च तक 16 और नई शाखाएं खोलेंगे। साल 2014-15 में 55 नई शाखाएं खोलने की योजना है। इसके अलावा मोबाइल और सेटेलाइट शाखाएं खोलने की भी हमारी कोशिश है। इसके साथ ही हम एटीएम का भी विस्तार कर रहे हैं।
अपने विस्तार पर हमें काफी तेजी से काम करना है क्योंकि केवल मेट्रो शहरों में ही सेवाएं देने से महिला बैंक खोलने का मकसद पूरा नहीं होगा। हम एनजीओ को भी जोड़ रहे हैं।
लखनऊ में एक एनजीओ के साथ मिलकर महिलाओं की जरूरत के उत्पाद बेचने वाली महिलाओं को छोटी दुकान खोलने के लिए कर्ज देने की योजना पर काम कर रहे हैं।