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बिजली वितरण पर मोदी ने दिए कुछ खास निर्देश
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
Updated Fri, 22 Aug 2014 10:57 AM IST
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बुनियादी ढांचा क्षेत्र को वापस पटरी पर लाने का दायित्व लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा मंत्रालय के लिए 2022 तक देशभर में कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक घाटा (एटीएंडसी) यानी विद्युत वितरण नुकसान मौजूदा 27 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी पर लाने की समयसीमा निर्धारित की है।
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इसके लिए राज्यों को प्रोत्साहित या दंडित करने के लिए नए फार्मूला लाने की बात कही गई है। ऊर्जा क्षेत्र की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के शीर्ष अधिकारियों, कैबिनेट सेक्रेटरी और ऊर्जा एवं नवीन व अक्षय ऊर्जा मंत्रियों से कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का बड़ा नुकसान स्वीकार योग्य नहीं है।
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प्रधानमंत्री ने इसके लिए संबंधित अधिकारियों से एक नया फार्मूला तैयार करने को कहा है, जिससे कि देशभर में यह घाटा 2022 तक घटाकर औसतन 15 फीसदी पर लाया जा सके। फिलहाल यह औसतन 27 फीसदी है। उन्होंने कहा कि एटीएंडसी घाटा भारतीय ऊर्जा सेक्टर के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है और इस मसले को राज्य सरकारों और राज्य इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को साथ में लेकर मजबूती से निपटाना चाहिए था।
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उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस लक्ष्य को हासिल करने के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने रिस्ट्रक्चर्ड एक्सीलेरेटेड पावर डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म प्रोग्राम (आरएपीडीआरपी) के जरिए प्रोत्साहन या दंडित करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया है।
उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों ने कुछ अच्छे कदम उठाए हैं, जिन्हें देशभर में प्रसारित करने की जरूरत है, जिससे कि विद्युत वितरण नुकसान को नीचे लाया जा सके। उन्होंने सक्रिय आधार पर प्रीपेड मीटरिंग, एटीएंडसी से सप्लाई लिंक्ड और आईटी अप्लीकेशन को प्रयोग में लाने का सुझाव दिया।
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा मंत्रालय और अन्य संबंधित शेयरधारकों को देश की पनबिजली क्षमता का पूर्ण दोहन करने के लिए संसाधन संपन्न राज्यों अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू एवं कश्मीर पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में एक निश्चित समय सीमा के भीतर ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना महत्वपूर्ण है।
अंतर्राज्यीय मसले पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। देश की पनबिजली क्षमता का लाभ उठाने के लिए इनका समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में 100 फीसदी रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल करने के लिए राज्य सरकारों को महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जरूरत है। ग्रामीण फीडरों को अलग करने की व्यवस्था राज्य सरकारों द्वारा बनाई जानी चाहिए।
टीएंडडी नेटवर्क के बीच की खाई पाटने और डीएसएम या एससीएडीए सुविधा विकसित करने में भी राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी तरह, मोदी ने ऊर्जा मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) को गांवों के विद्युतीकरण और राज्यों की भूमिका का विस्तार करने की कार्ययोजना तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए।
अक्षय ऊर्जा को अपेक्षित सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सरकार पारंपरिक ऊर्जा उत्पादकों द्वारा अक्षय ऊर्जा उत्पादन को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है। मोदी ने एमएनआरई, ऊर्जा मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) को अक्षय ऊर्जा उत्पादन अनिवार्य करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादक अक्षय ऊर्जा से अपनी क्षमता का कम से कम 5 से 10 फीसदी भी उत्पादन करती हैं, तो इससे देश में अक्षय ऊर्जा की क्षमता में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी।
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा मंत्रालय और सीईआरसी को विद्युत अधिनियम और टैरिफ नीति में आवश्यक नियमों और निर्देशों को शामिल करने का सुझाव दिया है। देश की सौर ऊर्जा क्षमता का अधिकाधिक दोहन करने के लिए मोदी ने कहा कि एमएनआरई को स्पष्ट नीतियां लाकर रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विभिन्न सरकारी भवनों, विभिन्न नहरों, स्टेडियम और अन्य खाली पड़े सार्वजनिक क्षेत्रों पर रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट अनिवार्य रूप से लगाए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने एमएनआरई से कहा है कि वह देश की अक्षय ऊर्जा क्षमता का अधिकाधिक दोहन करने के लिए नए उपाय सामने लाए और स्पष्ट नीतियां तैयार करे।
उन्होंने कहा कि एमएनआरई आरपीओ नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए चार महीने के भीतर राज्य सरकारों और सीईआरसी, डिस्कॉम, एसईआरसी से परामर्श कर आवश्यक कानूनी संशोधन और एडवाइजरी लाए।