{"_id":"5626a354-be4d-11e2-a519-d4ae52bc57c2","slug":"multinational-companies-are-buying-vegetables-from-farms","type":"story","status":"publish","title_hn":"मल्टीनेशनल कंपनियां खेतों से ही खरीद रही हैं सब्जियां","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
मल्टीनेशनल कंपनियां खेतों से ही खरीद रही हैं सब्जियां
गुड़गांव/ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2013 10:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फल-सब्जी के रिटेल कारोबार में उतरी मल्टीनेशनल कंपनियों ने अब खेतों को ही मंडी बना दिया है। कंपनियों के इस कदम से किसानों को 30 प्रतिशत तक का फायदा मिलने का दावा किया गया है।
विज्ञापन
कंपनियों ने गांव के स्तर पर अपने कलेक्शन सेंटर बना लिए हैं। हरियाणा से अगले एक साल में करीब दो हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।
मल्टी नेशनल कंपनियां फल-सब्जियों के कारोबार में अपना ट्रेंड बदलते हुए सब्जी मंडी की बजाए सीधे खेत तक पहुंच गई हैं, जिससे किसानों को बिचौलियों से राहत मिलेगी। साथ ही कंपनियों को भी अधिक मुनाफा मिलेगा।
विज्ञापन
कंपनी के स्टोर तक ताजे फल-सब्जियां जल्द पहुंचाने के लिए कंपनियों ने खेत के पास ही कलेक्शन सेंटर बना लिए हैं। कलेक्शन सेंटर से फल-सब्जियों को सीधेस्टोर तक वातानुकूलित गाड़ियों से ले जाया जा रहा है।
विज्ञापन
भारती वालमार्ट, रिलायंस, बिग बाजार, सिक्स-टेन, स्पेंसर सहित अन्य मल्टी नेशनल कंपनियों ने गुड़गांव के गांवों में अपने कलेक्शन सेंटर बनाए हैं।
पटौदी के गांव इच्छापुरी के किसान चांद सिंह, लोकरा के अशोक कुमार, ऊंचा माजरा के रविंद्र यादव, प्रागपुरा के अमीचंद व भांगरौला के किसान राकेश यादव ने बताया कि कंपनियों ने उनके साथ अनुबंध (कांट्रेक्ट) किया है, जिसमें एक दिन पहले ही भाव की जानकारी दी जा रही है। भाव पसंद न आने पर किसान अपनी फसल खुली मंडी में भी ले जा सकता है।
कंपनियों की ओर से मंडी की अपेक्षा 10 से 20 प्रतिशत अतिरिक्त भाव देने का दावा किया गया है। किराया, आढ़त को जोड़ा जाए, तो 30 प्रतिशत तक फायदा किसानों को हो रहा है। हरियाणा में गुड़गांव, मेवात, पलवल, फरीदाबाद, रेवाड़ी, सोनीपत, झज्जर के एनसीआर हिस्से में कंपनियों को अगले एक साल में करीब दो हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।
भारती वालमार्ट कंपनी के एग्रीकल्चर सेग्मेंट के कंट्री हेड मधुरेश ने बताया कि कंपनी की ओर से ग्रीन हाउस प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कंपनी फल-सब्जियों में केमिकल की मात्रा कम करने के लिए इनकी मार्किंग रेड लेवल, ब्ल्यू ,येलो होते हुए ग्रीन लेवल तक करेगी।