गरीबों की खाद्य सुरक्षा पर ज्यादातर राज्य उदासीन
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गरीबों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार को देश में भले ही खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने की जल्दी हो, लेकिन राज्य सरकारों का इस महत्वाकांक्षी योजना से ज्यादा सरोकार नहीं है। अनाज भंडारण, राशन की दुकानों के आधुनिकीकरण, आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और राशन कार्डों के डिजिटलाइजेशन का काम अभी भी ज्यादातर राज्यों में आधा-अधूरा ही हुआ है। खासकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, बिहार, झारखंड और उड़ीसा में आधुनिकीकरण की योजना तय समय सीमा में पूरी नहीं हुई है।
केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रो. केवी थॉमस के मुताबिक जिस तरह से राज्यों में राशन की दुकानों के आधुनिकीकरण, सप्लाई चैन मैनेजमेंट के कंप्यूटरीकरण, राशन कार्डों के डिजिटाइजेशन, यूआईडीएआई का काम चल रहा है, उससे सभी राज्यों में इसके पूरा होने में एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है।
कई राज्यों ने समय सीमा बढ़ा दी है, जबकि कई राज्यों ने अभी तक इसके लिए कोई समय सीमा ही निर्धारित नहीं की है। धीमी गति से काम करने के मामले ज्यादातर उन राज्यों में देखने के मिल रहे हैं, जहां खाद्य सुरक्षा की सर्वाधिक जरूरत है। इसके बावजूद राज्यों का रवैया उदासीन बना हुआ है।
थॉमस के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस काम की प्रगति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके लिए आवंटित राशि में 29.45 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि यहां सौ फीसदी राशन कार्डों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है। पंजाब में यह महज पांच फीसदी और बिहार में आधा फीसदी ही हुआ है।
राजस्थान ने संपूर्ण डिजिटलाइजेशन के लिए मार्च 2013 की समय सीमा निर्धारित की है। उत्तराखंड में महज 25.09 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं। इसके बावजूद यहां डिजिटलाइजेशन के काम की कोई जानकारी नहीं है।