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मूडीज ने दी रेटिंग घटाने की चेतावनी
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 18 Feb 2013 10:35 PM IST
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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने सरकार को चेताया है कि बढ़ता व्यापार घाटा देश की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट ला सकता है। इसके साथ ही बढ़ता घाटा देश की अर्थव्यवस्था पर ग्लोबल अस्थिरता के प्रभाव को भी बढ़ा सकती है। इसके साथ ही घाटे में इजाफे से महंगाई और बढ़ने की भी मूडीज ने चेतावनी दी है।
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वर्तमान में मूडीज ने भारत को सबसे निचले दर्जे की बीएए-3 की इनवेस्टमेंट रेटिंग दे रखी है और आउटलुक को स्थिर (स्टेबल) की श्रेणी में रखा है। ऐसे में रेटिंग में कोई भी गिरावट देश की क्रेडिट रेटिंग को कबाड़ (जंक) श्रेणी में ले जा सकती है।
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एजेंसी ने सरकार द्वारा हाल में ही जारी आंकड़े के मुताबिक जनवरी में देश का व्यापार घाटा बढ़ कर 20 अरब डॉलर पर पहुंच जाने का जिक्र करते हुए कहा कि घाटे में जारी बढ़ोतरी रेटिंग के लिए नुकसान दायक साबित हो सकती है।
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गौरतलब है कि देश का व्यापार घाटा जनवरी में अब तक के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर रहा। इससे पहले, अक्तूबर 2012 में 21 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रिकार्ड किया गया था। मूडीज के वाइस प्रसिडेंट व निवेश सेवा व मौद्रि जोखिम संबंधी वरिष्ठ विश्लेषक अतसी सेठ ने कहा कि व्यापार घाटा बढ़ने से मुद्रा कमजोर होगी, घरेलू बाजार में आयातित चीजों के दाम बढ़ेंगे और जिसके चलते पहले से ही ऊंचे स्तर पर कायम महंगाई दर और ऊपर जा सकती है।
भारत का व्यापार घाटा 2011 में हर महीने औसतन 13.5 अरब डॉलर और 2012 में 16 अरब डॉलर मासिक रहा। जबकि आर्थिक मंदी के दौर में वर्ष 2008 और 2010 के बीच हर महीने औसतन 9.5 अरब डॉलर का व्यापार घाटा दर्ज किया गया था। मूडीज के अनुसार पिछले दो साल में व्यापार घाटे में वृद्धि की वजह ग्लोबल स्तर पर नरमी से भारतीय निर्यात की मांग कम होना, तेल एवं सोने की कीमतों में वृद्धि तथा ढीली राजकोषीय नीति रही है।